यूरिया के लिए नीति प्रभाग

यूरिया नीति (मूल्य-निर्धारण एवं प्रशासन) तथा यूरिया मूल्य-निर्धारण नीति अनुभाग

 

  • देश में वर्तमान में 31 यूरिया इकाइयां हैं जिनमें से 28 यूरिया इकाइयां प्राकृतिक गैस का उपयोग करती हैं (या तो घरेलू गैस/एलएनजी अथवा दोनों का उपयोग कर रही हैं) और शेष तीन यूरिया इकाइयां फीडस्‍टॉक के रूप में नेफ्था का उपयोग कर रही हैं।
  • यूरिया का अधिकतम खुदरा मूल्‍य (एमआरपी) भारत सरकार द्वारा सांविधिक रूप से निर्धारित किया जाता है और वर्तमान में यह 5360/- रुपये/मी.टन (केन्‍द्रीय/राज्‍य करों को छोड़कर) है जिसमें 180/- रुपये/मी.टन निजी व्‍यापारियों/पीएसयू के लिए और 200 रुपये/मी.टन सहकारिताओं के लिए डीलर मार्जिन के रूप में है तथा 50 रुपये/मी.टन अतिरिक्‍त प्रोत्‍साहन के रूप में प्राप्ति की पावती और एमएफएमएस (आईएफएमएस) में स्‍टॉक की रिपोर्ट देने हेतु खुदरा विक्रेताओं के लिए, नीम लेपित यूरयिा के लिए उर्वरक विनिर्माता कंपनियों द्वारा एमआरपी (5360/- रुपये/मी.टन) का 5% अतिरिक्‍त प्रभारित किया जाता है। फार्मगेट पर उर्वरकों की सुपुदर्गी लागत और एमआरपी हेतु किसान द्वारा किए जाने वाले भुगतान के बीच के अंतर को भारत सरकार द्वारा उर्वरक विनिर्माता/आयातक को राजसहायता रूप में दिया जाता है।

 

  • यूरिया इकाइयों को राजसहायता के भुगतान संबंधी निम्‍नलिखित नीतियां 2003 से लागू थीं:-

 

             i.    

01.04.2003 से 31.03.2004 तक की अवधि के लिए नई मूल्‍य निर्धारण स्‍कीम (एनपीएस-।)

             ii.    

01.04.2004 से 31.09.2006 तक की अवधि के लिए एनपीएस-।।

            iii.    

01.10.2006 से 01.04.2014 की अवधि के लिए एनपीएस-।।।

            iv.    

02.04.2014 से 31.05.2015 की अवधि के लिए एनपीएस-।।।

 

  • वर्तमान नीतियां जिनके द्वारा यूरिया इकाइयों को राजसहायता का भुगतान किया जा रहा है, निम्‍नवत् हैं:-

 

             v.    

निर्धारित लागत और परिवर्तनीय लागत अर्थात् बैग की लागत, जल प्रभार और अगले आदेशों तक जारी रखने हेतु विद्युत प्रभारों की प्रतिपूर्ति से संबंधित एनपीएस-।।। और संशोधित एनपीएस-।।।

            vi.    

01.06.2015 से 31.03.2019 तक की अवधि के लिए नई यूरिया नीति-2015 (25 गैस आधारित यूरिया इकाइयों के लिए लागू)

           vii.    

मद्रास फर्टिलाइजर्स लिमिटेड-मणलि, सदर्न पेट्रोकेमिकल्‍स इंडस्‍ट्रीज कारपोरेशन (स्पिक)-तूतीकोरीन और मंगलौर केमिकल्‍स एण्‍ड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एमसीएफएल) के लिए लागू दिनांक 17 जून, 2015 की अधिसूचना

 

नई यूरिया नीति-2015 (25 गैस आधारित यूरिया इकाइयों के लिए लागू)

 

  • नई यूरिया नीति-2015 (एनयूपी-2015) स्‍वदेशी यूरिया का अधिकाधिक उत्‍पादन करने, यूरिया उत्‍पादन में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने और सरकार पर राजसहायता भार को तर्कसंगत बनाने के उद्देश्‍य से उर्वरक विभाग द्वारा 25 मई, 2015 को अधिसूचित की गई है जो 01 जून, 2015 से 31 मार्च, 2019 तक प्रभावी है।

 

  • एनयूपी-2015 के अनुसार 25 गैस आधारित यूरिया इकाइयों के लिए पूर्व निर्धारित ऊर्जा मानकों को जो पूर्ववर्ती नीतियों के दौरान निर्धारित किए गए थे, समाप्‍त कर दिया गया अथवा एनपीएस-।।। के पूर्व-निर्धारित ऊर्जा मानकों का औसत है और वे 01 जून, 2015 से 31 मार्च, 2018 तक के लिए प्रत्‍येक समूह हेतु निर्धारित ऊर्जा मानकों के आधार पर रियायती दर जो एनपीएस-।।। के पूर्व-निर्धारित के सामान्‍य औसत और वर्ष 2011-12, 2012-13 और 2013-14 के दौरान प्राप्‍त वास्‍तविक ऊर्जा खपत का औसत अथवा एनपीएस-।।। के पूर्व-निर्धारित ऊर्जा मानकों का औसत जो भी कम हो, होगा, को पाने के लिए पात्र होंगी।

 

  • इसके अतिरिक्‍त इन यूरिया इकाइयों को वर्ष 2018-19 में प्राप्‍त किए जाने हेतु ऊर्जा खपत के लक्ष्‍य दे दिए गए हैं। समूह-। के लिए वर्ष 2018-19 हेतु उर्जा मानक लक्ष्‍य 5.5 जी कैल/मी.टन है (टाटा केमिकल्‍स लिमिटेड-बबराला को छोड़कर जिसके लिए एनपीएस-।।। के विद्यमान पूर्व निर्धारित उर्जा खपत मानक हैं अर्थात् 5.417 जी कैल/ मी.टन जारी रहेंगे)। समूह-।। और समूह-।।। के लिए वर्ष 2018-19 के लिए उर्जा मानक क्रमश: 6.2 जी कैल/मी.टन और 6.5 जी कैल/मी.टन हैं।

 

  • अन्‍य परिवर्तनीय लागत उदाहरणार्थ थैले की लागत, जल प्रभार एवं वैद्युत शुल्‍क और नियत लागत के लिए क्षतिपूर्ति का निर्धारण एनपीएस-।।। (8 मार्च 2007 को अधिसूचित) और आशोधित एनपीएस-।।। (2 अप्रैल, 2014) के विद्यमान प्रावधानों के अनुसार किया जाता है।

 

  • 100% तक पुन: आकलित क्षमता (आरएसी) के उत्‍पादन हेतु 25 गैस आधारित यूरिया इकाइयां यूरिया के उत्‍पादन की कुल लागत प्राप्‍त करने हेतु पात्र होगी जिसमें निर्धारित लागत और परिवर्तनीय लागत शामिल है।

 

  • आरएसी से अधिक उत्‍पादन के लिए यूनिटें संबंधित परिवर्तनीय लागत तथा आयात समता कीमत तथा अन्‍य संगत प्रभार जिसे सरकार अन्‍य आयातित यूरिया खर्च करती है, के अधीन सभी स्‍वदेशी यूरिया यूनिटों की प्रति मी.टन नियत लागतों के न्‍यूनतम के बराबर प्रति मी.टन प्रोत्‍साहन के लिए पात्र हैं। तथापि, दिनांक 07 अप्रैल, 2017 की अधिसूचना के तहत वर्ष 2016-17 के दौरान आरएसी से अधिक यूरिया के उत्‍पादन के लिए अगला संशोधन इस प्रकार शामिल किया गया कि यूनिटें अपनी संबंधित परिवर्तनीय लागत तथा आयात समता कीमत तथा अन्य संगत प्रभार जिसे सरकार यूरिया के आयात पर वहन करती है, तथा यूरिया विनिर्माता इकाइयों द्वारा संदत्‍त यूरिया के लिए केन्‍द्र सरकार की उगाहियों के भारित औसत की राशि के अधीन सभी स्‍वदेशी यूरिया यूनिटों की प्रति मी.टन नियत लागत की न्‍यूनतम लागत के बराबर एकसमान प्रति मी.टन प्रोत्‍साहन के लिए पात्र थीं। उक्‍त संशोधन के तहत यह निर्णय लिया गया है कि आयात समता कीमत में किसी उतार-चढ़ाव जिसका यूरिया यूनिटों द्वारा आरएसी से अधिक उत्‍पादन पर बुरा प्रभाव पड़ता हो, की स्थिति में उर्वरक विभाग व्‍यय विभाग के परामर्श से समुचित निर्णय लेने के लिए प्राधिकृत है।

 

  • पांच इकाइयां नामत: एमएफएल-मणलि, एमसीएफएल-मंगलौर, स्पिक-तूतीकोरीन, बीवीएफसीएल-नामरूप-।। और बीवीएफसीएल-नामरूप-।।। इस स्‍कीम के अंतर्गत शामिल नहीं है क्‍योंकि यह इकायां देश में गैस पाइपलाइन नेटवर्क से जुडी नहीं हैं। एनयूपी-2015 के अनुसार बीवीएफसीएल की नामरूप-।। और नामरूप-।।। इकाइयों को बंद करने का प्रास्‍ताव है तथा एक नई उच्‍च दक्षता इकाई स्‍थापित की जाएगी जिस पर उनके पुनर्गठन प्रस्‍ताव के तहत पृथक रूप से विचार किया जाएगा। तब तक यह दो इकाइयां संशोधित एनपीएस-।।। के प्रावधानों के तहत कार्य करती रहेंगी।

 

नेफ्था आधारित यूरिया इकाइयों के लिए

 

  • तीन यूरिया इकाइयां नामत: मद्रास फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एमएफएल)-मणलि, सदर्न पेट्रोकेमिकल्‍स इंडस्‍ट्रीज कारपोरेशन (स्पिक)-तूतीकोरिन और मंगलौर केमिकल्‍स एण्‍ड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एमसीएफएल) 17 जून, 2015 की अधिसूचना द्वारा शासित है जिसमें इन संयंत्रों को पाइपलाइन अथवा किसी अन्‍य साधन से गैस की उपलब्‍धता और कनेक्टिविटी होने तक, नेफ्था का फीडस्‍टॉक के रूप में प्रयोग करके उत्‍पादन जारी रखने की अनुमति दी गई है। नेफ्था आधारित यूरिया इकाइयां निम्‍न शर्तों पर राजसहायता लेने की पात्र हैं:-

 

(i)     ये इकाइयां अधिसूचना की तिथि से संशोधित ऊर्जा मानक के आधार पर राजसहायता के लिए पात्र होंगी जो नई मूल्‍य निर्धारण योजना (एनजीएस)-।।। के पूर्व-स्‍थापित ऊर्जा मानक और वर्ष 2011-12, 2012-13 और 2013-14 के दौरान प्राप्‍त निम्‍नतम वार्षिक विशिष्‍ट ऊर्जा खपत का साधारण औसत या एनपीएस-।। के पूर्व-स्‍थापित ऊर्जा मानक, जो भी कम हो, होगा।

 

(ii)     इन संयंत्रों के लिए रियायत दर का सैद्धांतिक रूप से निर्धारण आरएलएनजी पर राज्‍य कर (वैट, प्रविष्‍टि कर) काटने के पश्‍चात् हालिया परिवर्तित संयंत्रों को आरएलएनजी की सुपुर्दगी लागत के भारित औसत अथवा नेफ्था/एफओ पर यूरिया उत्‍पादन के लिए खपत किए गए नेफ्था/एफओ पर राज्‍य करों (वैट, प्रविष्टि कर) की कटौती के पश्‍चात् नेफ्था/एफओ से यूरिया के उत्‍पादन की लागत, जो भी कम हो, आधार पर किया जाएगा।

 

(iii)    अन्‍य परिवर्तनीय लागत जैसे बैग की लागत, पानी एवं बिजली शुल्‍क के लिए क्षतिपूर्ति एवं नियत लागत एनपीएस-।।। एवं संशोधित एनपीएस-।।। के विद्यमान प्रावधानों के अनुसरण में निर्धारित की जाएगी।

 

  • इन तीन इकाइयों के लिए वर्ष 2018-19 से विशिष्ट ऊर्जा खपत मानदंड 6.5 जीकैल/मीट्रक टन नियम किया गया था।

 

नई यूरिया नीति (एनयूपी) 2015 में संशोधन:

 

  • 28 मार्च, 2018 की अधिसूचना के जरिये उर्वरक विभाग ने सभी यूरिया विनिर्माण इकाइयों (बीवीएफसीएल को छोड़कर) को दिए गए लक्ष्य ऊर्जा मानकों के संबंध में निम्नलिखित निर्णयों को अनुमोदित किया है:

 

(i)      

11 यूरिया विनिर्माण इकाइयों अर्थात् वाईएफआईएल, एनएफएल-विजयपुर-।।, जीआईएल, सीएफसीएल-गडेपान-। और ।।, इफ्को-आंवला-।।, आरसीएफ-थाल, इफ्को कलोल, इफ्को-आंवला-।, इफ्को-फूलपुर-। और ।। के लिए एनयूपी-2015 के पैरा 3.2 में यथा-उल्लिखित लक्ष्य ऊर्जा खपत मानदंड को 1 अप्रैल 2018 से प्रवृत्त होंगे।

 

(ii)     14 यूरिया विनिर्माण इकाइयों, अर्थात् एनएफएल विजयपुर-।, कृभको-हजीरा, केएफएल-शाहजहांपुर, एनएफसीएल-काकीनाडा़-।, एनएफसीएल-काकीनाडा़-।।, जीएनएफसी-भरुच, जीएसएफसी-वड़ोदरा, एनएफएल-बठिण्डा, एनएफएल-नांगल, एनएफएल-पानीपत, एसएफसी-कोटा, केएफसीएल-कानपुर, आरसीएफ ट्रॉम्बे-V, जैडएसीएल-गोवा के लिए नई यूरिया नीति-2015 के मौजूदा मानदंडों को आगे 2 वर्ष की अवधि के लिए अर्थात् 31 मार्च 2020 तक निम्नलिखित दंडों के साथ बढ़ाया जा सकता है:

 

(क)   

एनयूपी ऊर्जा मानदंडों और लक्ष्य ऊर्जा के बीच अंतर की 2% ऊर्जा के समतुल्य जुर्माना प्रथम वर्ष के लिए अर्थात् 2018-19 के लिए लगाया जा सकता है।

(ख)   

एनयूपी ऊर्जा मानदंडों और लक्ष्य ऊर्जा के बीच अंतर की 5% ऊर्जा के समतुल्य जुर्माना दूसरे वर्ष के लिए अर्थात् 2019-20 के लिए लगाया जा सकता है।

(ग)   

यूरिया विनिर्माण इकाइयां 2018-19 से 2019-20 तक बढ़ाई गई अवधि के दौरान लक्ष्य ऊर्जा मानदंडों को अनिवार्यत: प्राप्त करें अन्यथा चूककर्ता इकाइयों पर उर्वरक विभाग के परामर्श से अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है।

 

(iii)   उक्त लक्ष्य ऊर्जा मानदंडों को 31 मार्च 2025 तक जारी रखा जा सकता है। इस दौरान, नीति आयोग के अंतर्गत एक विशेषज्ञ निकाय 01 अप्रैल 2025 से प्राप्त किए जाने वाले ऊर्जा मानदंडों की सिफारिश करने का कार्य करेगा।

 

(iv)   तीन नेफ्था आधारित यूरिया इकाइयों अर्थात् एमएफएल, एमसीएफएल, स्पिक को भी दिनांक 17 जून 2015 की नीतिगत अधिसूचना के पैरा (2) के तहत मौजूदा ऊर्जा मानदंडों के लिए अन्य दो वर्ष के लिए अर्थात् 31 मार्च 2020 तक के लिए अथवा इन इकाइयों के पाइपलाइन कनैक्टिविटी प्राप्त कर लेने तक, जो भी पहले हो, अनुमति दी जा सकती है। दिनांक 8 मार्च 2007 की एनपीएस-।।। नीति के पैरा 3(viii) और 5(ii) के अनुसार गैस पाइपलाइन कनैक्टिविटी की तारीख से 5 वर्ष की नियत अवधि के लिए ऊर्जा दक्षता की कोई मॉपिंग नहीं होगी।

 

नई निवेश नीति-2012

 

  • सरकार ने यूरिया क्षेत्र में नए निवेश को सुगम बनाने, भारत को आत्‍मनिर्भर बनाने तथा आयात पर निर्भरता कम करने के मुख्‍य उद्देश्‍य के साथ 02 जनवरी, 2013 को नई निवेश नीति-2012 अधिसूचित की है। एनआईपी-2012 की मुख्‍य विशेषताएं इस प्रकार हैं:-

 

             i.    

नीति केवल गैस आधारित संयंत्रों का समर्थन करती है।

             ii.    

इसमें लचीले न्‍यूनतम तथा अधिकतम मूल्‍य का ढांचा है जिसकी गणना 6.5 अमेरिकी डॉलर से 14 अमेरिकी डॉलर/एमएमबीटीयू तक गैस के सुपुर्दगी मूल्‍य पर की जाती है।

            iii.    

न्‍यूनतम मूल्‍य 12% के साम्‍या के प्रतिलाभ (आरओई) पर तथा अधिकतम मूल्‍य 20% के आरओई पर निर्धारित किया गया है।

            iv.    

ग्रीनफील्‍ड/पुनरुद्धार तथा ब्राउनफील्‍ड परियोजनाओं के लिए न्‍यूनतम एवं अधिकतम मूल्‍य, सुपुर्दगी गैस के मूल्‍य में वृद्धि के साथ-साथ बढ़ेगा अर्थात् गैस के मूल्‍य में प्रत्‍येक 0.1 अमेरिकी डॉलर/एमएमबीटीयू की वृद्धि, न्‍यूनतम तथा अधिकतम मूल्‍य को 14 अमेरिकी डॉलर/एमएमबीटीयू गैस के सुपुर्दगी मूल्‍य तक 2 अमेरिकी डॉलर/मी.टन तक बढ़ा देगी।

             v.    

14 अमेरिकी डॉलर/एमएमबीटीयू के सुपुर्द गैस मूल्‍य के बाद केवल न्‍यूनतम मूल्‍य को बढ़ाया जाएगा।

            vi.    

पुनरुत्‍थान परियोजनाओं के लिए न्‍यूनतम एवं अधिकतम मूल्‍यों को 7.5 अमेरिकी डॉलर/एमएमबीटीयू के सुपुर्दगी गैस मूल्‍य से जोड़ा गया है और 0.1 अमेरिकी डॉलर/एमएमबीटीयू के सुपुर्दगी गैस मूल्‍य में प्रत्‍येक वृद्धि के लिए न्‍यूनतम तथा अधिकतम मूल्‍य 2.2 अमेरिकी डॉलर/मी.टन तक बढ़ जाएगा।

           vii.    

यह बन्‍द इकाइयों के पुनरुद्धार का समर्थन करती है।

           viii.    

यह साधन संपन्‍न देशों में संयुक्‍त उद्यम लगाने के लिए भारतीय उद्योग द्वारा निवेश को प्रोत्‍साहित करती है।

            ix.    

पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में इकाइयों के लिए गैस मूल्‍य के संबंध में विशेष छूट, जो भारत सरकार/राज्‍य सरकार द्वारा दी जा रही है, किसी भी नए निवेश पर उपलब्‍ध होगी। यदि सुपुर्दगी मूल्‍य (विशेष छूट की अनुमति के बाद) 6.5 अमरिकी डॉलर/एमएमबीटीयू के नीचे जाता है तो न्‍यूनतम तथा अधिकतम मूल्‍य के लिए उचित समायोजन लागू होगा जोकि वित्‍त मंत्रालय के अनुमोदन के अधीन है।

 

एनआईपी-2012 में संशोधन:-

 

·        

दिनांक 07 अक्‍तूबर, 2014 के द्वारा नई निवेश नीति-2012 (एनआईपी-2012) में निम्‍नलिखित संशोधन किए गए हैं:-

 

(।)     एनआईपी-2012 के पैरा 8.1 को निम्‍नलिखित रूप में प्रतिस्‍थापित किया गया है:

 

       इस संशोधन अधिसूचना की तारीख से केवल उन इकाइयां जिनका उत्‍पादन पांच वर्षों के भीतर शुरू होता है, इस नीति के तहत शामिल होंगी। राजसहायता उत्‍पादन शुरू होने की तिथि से 8 वर्षों की अवधि के लिए वर्तमान में हो रही मात्र घरेलू बिक्री पर ही दी जाएगी। तत्‍पश्‍चात इकाइयां उस समय प्रचलित यूरिया नीति द्वारा शासित होंगी।’  

 

(।।)    एनआईपी-2012 के अंतर्गत परियोजना प्रस्‍तावकों की गंभीरता/विश्‍वसनीयता को सुनिश्चित करने हेतु तथा परियोजना के समय पर निष्‍पादन हेतु सभी परियोजना प्रस्‍तावकों को प्रत्‍येक परियोजना के लिए 300 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी (बीजी) प्रस्‍तुत करनी अपेक्षित होगी। बीजी परियोजना चक्र में उपलब्धियों से जुड़ी होगी। 300 करोड़ रुपये में से बीजी के 100 करोड़ रुपये एलएसटीके/ईपीसीए ठेकेदारों की छंटाई को अंतिम रूप दे दिए जाने के पश्‍चात् जारी किए जाएंगे तथा अग्रिम को ठेकेदार के खाते में जारी किया जाएगा। बीजी का 100 करोड़ रुपये उपकरणों के मंगाए जाने का आदेश दे दिए जाने पर और कार्यस्‍थल में आपूर्ति कर दिए जाने पर अथवा परियोजना चक्र के मध्‍य में जो भी पहले हो, जारी किया जाएगा तथा बीजी के शेष 100 करोड़ रुपये परियोजना की पूर्णता पर जारी किये जाएंगे। तथापि, पीएसयू को बीजी प्रस्‍तुत करने से छूट दी गई है।

 

(।।।)    सचिव (उर्वरक) की अध्‍यक्षता में विभिन्‍न मुद्दों जो एनआईपी-2012 के कार्यान्‍वयन के दौरान उठेंगे, पर निर्णय लेने हेतु सचिवों की एक समिति गठित की गई है जिसमें सचिव (व्‍यय विभाग), सचिव (एमओपीएनएण्‍डजी), सचिव (योजना आयोग) और सचिव (कृषि) शामिल हैं।

 

एकसमान मालभाड़ा नीति

 

·        

उर्वरक विभाग देश के सभी भागों में, विशेष रूप से देश के सुदूर/दूरस्‍थ इलाकों में उर्वरकों की उपलब्‍धता सुनिश्‍चित करने के उद्देश्‍य से दिनांक 17 जून, 2008 की अधिसूचना द्वारा 01 अप्रैल, 2008 से एकसमान मालभाड़ा नीति (यूएफपी) घोषित की है। मालभाड़ा राजसहायता का भुगतान संयंत्र/बंदरगाह से ब्‍लॉक/जिले में यूरिया के परिवहन हेतु यूरिया इकाइयों को किया जाता है।

·        

प्रशुल्‍क आयोग की सिफारिशों पर आधारित दिनांक 17.06.2015 की अधिसूचना के तहत वर्ष 2008-09 के लिए 500 कि.मी. तक प्राथमिक सड़क संचलन के संबंध में स्‍लैब-वार दरें अधिसूचित की गई थीं। प्रत्‍येक वित्‍तीय वर्ष के लिए कथित दरें बढ़ाई गई/घटाई गई हैं।

·        

उर्वरक विभाग ने दिनांक 1 सितम्‍बर, 2011 की अधिसूचना के तहत खुदरा केन्‍द्र से उतराई रेक प्‍वाइंट तक उर्वरकों के द्वीतीयक संचलन के मामले में प्रशुल्‍क आयोग द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर वर्ष 2007-08, 2008-2009 तथा 2009-10 के लिए प्रति टन प्रति कि.मी. मानक परिवहन दरें जारी की है।  उर्वरकों के द्वीतीयक संचलन के मामले में सड़क परिवहन हेतु बढाई गई/घटाई गई प्रति मी.टन. प्रति कि.मी. (पीटीपीके) दरें उर्वरक विभाग द्वारा वार्षिक रूप से अधिसूचित की जाती हैं।