उर्वरक नीति

उर्वरक नीति 

  

कृषि के निरंतर विकास और संतुलित पोषक तत्‍व अनुप्रयोग को बढ़ावा देने के लिए आवश्‍यक है कि किसानों को उर्वरक वहनीय मूल्‍य पर उपलब्‍ध कराया जाए। इसी उद्देश्‍य से एकमात्र नियंत्रित उर्वरक यूरिया को सांविधिक अधिसूचित एकसमान बिक्री मूल्‍य पर बेचा जा रहा है, और नियंत्रणमुक्‍त फॉस्‍फेटयुक्‍त और पोटाशयुक्‍त उर्वरकों को एक सांकेतिक अधिकतम खुदरा मूल्‍य (एमआरपी) पर बेचा जा रहा है। उत्‍पादकों द्वारा नियंत्रित मूल्‍यों के कारण उनके निवेश पर एक उचित प्रतिलाभ अर्जित करने के संबंध में आ रही कठिनाइयों को, यूरिया इकाइयों के लिए नई मूल्‍य निर्धारण नीति के अंतर्गत और नियंत्रणमुक्‍त फॉस्‍फेटयुक्‍त और पोटाशयुक्‍त उर्वरकों के लिए रियायत योजना के जरिए सहायता करके, कमा किया जा रहा है। सांविधिक तौर पर अधिसूचित बिक्री मूल्‍य और सांकेतिक एमआरपी सामान्‍यत: उत्‍पादन इकाई की उत्‍पादन लागत से कम होते हैं। उत्‍पादन लागत और बिक्री मूल्‍य/एमआरपी के बीच के अंतर को, उत्‍पादकों को राजसहायता/रियायत के रूप में भुगतान किया जाता है। चूंकि स्‍वदेशी और आयातित दोनों उर्वरकों का उपभोक्‍ता मूल्‍य समान रूप से निर्धारित किया जाता है इसलिए आयातित यूरिया और नियंत्रणमुक्‍त फॉस्‍फेटयुक्‍त और पोटाशयुक्‍त उर्वरकों के लिए भी वित्‍तीय सहायता प्रदान की जाती है।  

 

अ.    यूरिया मूल्‍य-निर्धारण नीति: 

  

(क)   नई मूल्‍य निर्धारण नी‍ति (एनपीएस)

       

(।)    एनपीएस-।

 

यूरिया के लिए से नई मूल्‍य-निर्धारण नीति 1 अप्रैल, 2003 लागू की गई थी। एनपीएस का प्रथम चरण 1 अप्रैल, 2003 से 31 मार्च, 2004 तक एक वर्ष की अवधि के लिए था। उपर्युक्‍त नीति का मुख्‍य विचार और लक्ष्‍य अतिदक्ष फीडस्‍टॉक, नवीनतम प्रौद्योगिकी के प्रयोग पर आधारित अंतरराष्‍ट्रीय मानकों के दक्ष मानदण्‍डों के प्रोत्‍साहित करना तथा इकाइयों की व्‍यवहार्य दर की वापसी भी सुनिश्‍चित करना था। व्‍यवहार्य दर भी सुनिश्‍चित करना था।

 

(।।)   एनपीएस-।।

 

दूसरा चरण 1 अप्रैल, 2004 से 31 मार्च, 2006 तक दो वर्ष की अवधि के लिए था जिसे बढ़ाकर 30 सितम्‍बर, 2006 तक कर दिया गया था। एनपीएस के दूसरे चरण के दौरान यूरिया इकाइयों के लिए पूर्वनिश्चित ऊर्जा मानक दिए गए थे। उक्‍त नीति के अनुसार वृद्धि/कमी का आकलन तिमाही/वार्षिक आधार पर किया जाना था। तथापि, यदि किसी इकाई की वास्‍तविक ऊर्जा खपत, पूर्व निश्‍चित ऊर्जा मानकों से कम होती है तो परिणामी अधिक्‍य को सबसे सस्‍ते इनपुट की मूलदर में वृद्धि/कमी के आधार पर आंका जाएगा।

 

(।।।)   एनपीएस-।।।

 

नई मूल्‍य निर्धारण नीति का तीसरा चरण 8 मार्च, 2007 को अधिसूचित किया गया था और उसे 1 अक्‍तूबर, 2006 से 31 मार्च, 2010 तक प्रभावी किया गया था। एनपीएस के चरण-।।। के दौरान यूरिया के अतिरिक्‍त उत्‍पादन को प्रोत्‍साहित करने संबंधी नीति उसकी अधिसूचना जारी होने की तारीख से तब तक के लिए लागू की गई थी जब इकाइयों द्वारा यूरिया का अतिरिक्‍त उत्‍पादन उनकी उत्‍पादन की 100% से अधिक हो जाता है। ऐसी स्थिति में यह विद्यमान नीति के अंतर्गत शासित होगा और प्राप्‍त होने वाला निवल लाभ सरकार और इकाई के बीच 65:35 के अनुपात में होगा।

 

एनपीएस-।।। में इसकी अधिसूचनाओं के बाद निम्‍नलिखित संशोधन किए गए हैं:- 

 

  • दिनांक 10 जुलाई, 2009 की अधिसूचना सं.12012/19/2007-एफपीपी से किए गए संशोधन-92 के बाद नेफ्था आधारित समूह के लिए क्षमता उपयोग को 95% के रूप में अंगीकार करना, समूह औसतन सिद्धांत के कारण सख्‍ती से, निर्धारित लागत में कमी को मानकीय निर्धारित लागत के 10% तक सीमित करना, बफर स्‍टॉकिंग योजना के लिए पैरामीटर्स का ब्‍यौरा देना।

 

  • दिनांक 6 मार्च, 2009 को जारी अधिसूचना सं.12014/1/2008-एफपीपी विद्यमान यूरिया इकाइयों को दोबारा से शुरू करने से संबंधित नीति-एनपीएस-।।। में संशोधन करने से संबंधित है। उपर्युक्‍त योजना यूरिया इकाइयों यथा आरसीएफ-ट्राम्‍बे, डीआईएल/केएफसीएल-कानपुर और फैक्‍ट-कोचीन की कामबंदी पर लागू थीं। विद्यमान फीडस्‍टॉक/ईंधन पर उत्‍पादन की शुरूआत करनी थी और बाद में इस उत्‍पादन को गैस आधारित प्रणाली में परिवर्तित करना था।

 

  • दिनांक 6 मार्च, 2009 को जारी अधिसूचना सं.12014/1/2008-एफपीपी-एनपीएस-।।। का संशोधन-आरसीएफ-ट्राम्‍बे इकाई द्वारा यूरिया उत्‍पादन की शुरूआत करने संबंधी नीति। यह अधिसूचना एनपीएस-। और ।। के अंतर्गत इकाई के लिए उपलब्‍ध वर्तमान ऊर्जा के साथ एनपीएस-।।। के अंतर्गत गैस आधारित यूरिया इकाइयों की भारित औसत नियत लागत के बराबर न्‍यूनतम नियत लागत की अनुमति देकर आरसीएफ-ट्राम्‍बे को पुन: चालू करने को सुविधाजनक बनाने से संबंधित है।

 

  • दिनांक 6 मार्च, 2009 को जारी अधिसूचना सं.12014/1/2008-एफपीपी से जारी अधिसूचना- एफओ/एलएसएचएस यूरिया इकाइयों को प्राकृतिक गैस में परिवर्तित करने से संबंधित है। 8 फरवरी, 2010 को जारी अधिसूचनाओं के अंतर्गत एनएफएल की बठिंडा, नांगल तथा पानीपत स्थित फ्यूल ऑयल/लो सल्‍फर हैवी स्‍टॉक (एफओ/एलएसएचएस) आधारित यूरिया इकाइयों को प्राकृतिक गैस (एनजी) में परिवर्तित करने का प्रावधान है; 14 दिसम्‍बर, 2009 को जारी अधिसूचनाओं के अंतर्गत गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर कारपोरेशन (जीएनवीएफसी) स्थित फ्यूल ऑयल/लो सल्‍फर हैवी स्‍टॉक (एफओ/एलएसएचएस) आधारित यूरिया इकाई को प्राकृतिक गैस (एनजी) में परिवर्तित करने का प्रावधान है उपर्युक्‍त अधिसूचनाओं का संबंध विशेष नियत लागत के माध्‍यम से एफओ/एलएसएचएस इकाइयों की परिवर्तन लागत का पांच वर्षों के लिए कुछेक पैरामीटरों के अनुसार परिवर्तन के पश्‍चात् पता लगाना है। यह योजना एफओ/एलएसएचएस इकाइयों यथा एनएफएल (नांगल, बठिंडा और पानीपत) तथा जीएनवीएफसी-भरूच के लिए लागू है।

 

नई मूल्‍य निर्धारण योजना के चरण-।।। के बाद मौजूदा यूरिया हेतु नीति बनाना 

 

       उर्वरक नीति की समीक्षा के लिए गठित मंत्री के समूह (जीओएल) ने 5 जनवरी, 2011 को आयोजित बैठक में श्री सौमित्र चौधुरी, सदस्‍य योजना आयोग की अध्‍यक्षता में एक समिति गठित करने का निर्णय लिया है जोकि यूरिया में पोषक-तत्‍व आधारित राजसहायता (एनबीएस) को लागू करने के प्रस्‍ताव की समीक्षा के पश्‍चात् उपयुक्‍त सिफारिशें करेगी।

 

(ख)   मौजूदा यूरिया इकाइयों के लिए संशोधित एनपीएस-।।।

 

सरकार ने हाल में मौजूदा यूरिया इकाइयों के लिए संशोधित एनपीएस-।।। को 2 अप्रैल, 2014 को अधिसू‍चित किया है जिसका उद्देश्‍य लागत वर्ष 2002-03 के स्‍तर पर नियत लागत के स्थिर होने के कारण मौजूदा यूरिया इकाइयों की अल्‍पवसूलियों के मुद्दे पर ध्‍यान देना था। यह नीति अधिसूचना जारी होने की तारीख से एक वर्ष की अवधि के लिए लागू होगी। इस नीति में यूरिया इकाइयों की रियायत दरों की गणना को, कुछेक संशोधनों सहित एनपीएस-।। के अनुसार जारी रखने पर परिकल्‍पना की गई है। उक्‍त नीति के अनुसार मौजूदा यूरिया इकाइयों को 350 रुपए प्रति मी.टन की अधिकतम अतिरिक्‍त नियत लागत (4 घटकों अर्थात् वेतन एवं मजदूरी, ठेका मजदूर, बिक्री खर्च और मरम्‍मत एवं रख-रखाव में वृद्धि के लिए) या 2002-03 की तुलना में 2012-13 के दौरान नियत लागत के उपर्युक्‍त 4 घटकों में वास्‍तविक वृद्धि के अनुसार, जो भी कम हो, भुगतान किया जाएगा। तथापि, केएफसीएल और बीवीएफसीएल-।। के मामलों में, जिनके लिए 4 घटकों के संबंध में वर्ष 2002-03 या 2012-13 के लिए लागत आंकड़े उपलब्‍ध नहीं हैं, उन्‍हें सबसे बाद वाले वर्ष के उपलब्‍ध प्रमाणित लागत आंकड़े के अनुसार इन 4 घटकों में 521 रुपए प्रति मी.टन के अतिरिक्‍त हुई वास्‍तविक वृद्धि किन्‍तु अधिकतम 350 रुपए मी.टन के हिसाब से भुगतान किया जाएगा।

 

      नीति में उपर्युक्‍त अतिरिक्‍त नियत लागत को ध्‍यान में रखते हुए 2300 रुपए प्रति मी.टन की न्‍यूनतम नियत लागत या वर्ष 2012-13 के दौरान वास्‍तविक नियत लागत, जो भी कम हो, का भुगतान किए जाने का भी प्रावधान है। यह सभी यूरिया इकाइयों द्वारा उपलब्‍ध कराये गये वर्ष 2012-13 के प्रमाणित नियत लगात आकड़ों पर निर्भर होगा। इसके अलावा, उन सक्षम इकाइयों जो गैस में परिवर्तित तथा 30 वर्ष से अधिक पुरानी हैं के हितों को संरक्षण देने के उद्देश्‍य से नीति में इन इकाइयों को 150 रुपए प्रति मी.टन की विशेष क्षतिपूर्ति प्रदान करने का प्रावधान है।

 

      उच्‍च लागत वाली नेफ्था आधारित यूरिया इकाइयों नामत: स्पिक-तूतीकोरिन, एमएफएल मणलि और एमसीएफएल मंगलौर के उत्पादन को जारी रखने का प्रावधान भी संशोधित एनपीएस-।।। में किया गया है जब तक कि इन इकाइयों को गैस की उपलब्‍धता और कनेक्‍टिविटी उपलब्‍ध न हो जाए, या जून 2014 तक, जो भी पहले हो।

 

      वर्ष 92 के पश्‍चात् नेफ्था आधारित समूह नामत: इफ्को, फूलपुर-।। और सीएफसीएल-।। की दो इकाइयों की क्षमता उपयोगिता 95% से बढ़कर 98% हो गई है जोकि गैस आधारित इकाइयों के बराबर है। एफआईसीसी इन इकाइयों के लिए निर्धारित लागत की समूह औसत पर पुन: कार्य कर सकती है।

 

(ख)   यूरिया क्षेत्र में निवेश नीति  

 

                नई यूरिया परियोजनाओं की स्थापना और मौजूदा यूरिया परियोजनाओं का विस्‍तार करने के लिए 29.01.2004 को एक मूल्‍य-निर्धारण समिति का गठन, किया गया था ताकि देश में कृषि उत्‍पादन को बढ़ाने के लिए यूरिया की बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए यूरिया की घरेलू उत्‍पादन क्षमता में संवर्धन किया जा सके। नीति का उद्देश्‍य उद्यमियों को उर्वरक क्षेत्र में उनकी निवेश योजनाओं के बारे में निर्णय लेने में सक्षम बनाना है। नीति से अपेक्षा थी कि इससे अंतर्राष्‍ट्रीय दक्षता मानकों के साथ संयंत्रों को लगाने हेतु प्रोत्‍साहन मिलेगा और नई परियोजनाओं तथा मौजूदा इकाइयों के विस्‍तार में नए निवेश आ सकेंगे।

 

(क)   नई निवेश नीति-2008  

 

यह नीति दीर्घावधिक औसत लागत (एलआरएसी) के सिद्धांत पर आधारित थी और इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए सफल नहीं हुई। प्राकृतिक गैस, जो यूरिया के उत्‍पादन के लिए महत्‍वपूर्ण फीडस्‍टॉक है, की अनुपलब्‍धता भी यूरिया के उत्‍पादन हेतु स्‍वेदेशी क्षमता को आगे और बढ़ाने में एक बड़ी बाधा रही है। तथापि, 2009 के बाद से गैस की उपलब्‍धता में सुधार के प्रक्षेपण से, यह उम्‍मीद की जाती है कि इससे उर्वरक क्षेत्र में भी निवेश आएगा। इसके अलावा 4 सितम्‍बर, 2008 की अधिसूचना के जरिए सरकार ने इस क्षेत्र में अत्‍यावश्‍यक निवेश को आकर्षित करने के लिए यूरिया क्षेत्र हेतु नई निवेश नीति अधिसूचित की 1 यह नीति आईपीपी बेंचमार्क पर आधारित थी।

 

      नीति से अपेक्षा थी की इससे आईपीपी से कम मूल्‍य पर यूरिया की उपलब्‍धता के रूप में सरकार की बचतों में बढ़ोतरी होगी और साथ ही आयात घटने के कारण आयात मूल्‍य नीचे जाने से अप्रत्‍यक्ष बचत भी होगी। नई निवेश नीति का उद्देश्‍य विद्यमान यूरिया इकाइयों का पुनरुद्धार, विस्‍तार पुनरुत्‍थान और ग्रीनफील्‍ड/ब्राउनफील्‍ड परियोजनाओं की स्‍थापना थी। नीति से खपत और घरेलू उत्‍पादन के बीच अन्‍तर को अगले पांच वर्षों में पूरा हो जाने की संभावना थी बशर्तें उचित मूल्‍य पर गैस की सुनिश्चित एवं पर्याप्‍त उपलब्‍धता हो। नई निवेश नीति-2008 की मुख्‍य विशेषताएं निम्‍नलिखित हैं:-

 

1.            यह नीति क्रमश: 250 अमरिकी डॉलर/मी.टन तथा 425 अमरिकी डॉलर/मी.टन के उपयुक्‍त न्‍यूनतम और अधिकतम मूल्‍यों सहित आयात सममूल्‍य (आईपीपी) बैंचमार्क पर     आधारित है।

 

1.    पुनरुत्‍थान परियोजनाएं: अमोनिया-यूरिया उत्‍पादन की मौजूदा श्रृंखला में 1000 करोड़ रुपए तक के निवेश से वर्तमान संयंत्रों की क्षमता में की गई वृद्धि को मौजूदा इकाइयों के पुनरुत्‍थान के रूप में माना जाएगा। मौजूदा इकाइयों के पुनरुत्‍थान से उत्‍पादित अतिरिक्‍त यूरिया को ऊपर दिए गए सुझाव के अनुसार न्‍यूनतम और अधिकतम मूल्‍य सहित 85% आयात सममूल्‍य की मान्‍यता दी जाएगी।

 

1.    विस्‍तार परियोजनाएं: कुछ सामान्‍य उपयोगी वस्‍तुओं का उपयोग करके मौजूदा उर्वरक संयंत्रों के परिसर में नया अमोनिया-यूरिया संयंत्र (एक अलग नया अमोनिया-यूरिया श्रृंखला) की स्‍थापना को विस्‍तार परियोजना माना जाएगा। इसमें निवेश 3000 करोड़ रुपए की न्यूनतम सीमा से अधिक होना चाहिए। मौजूदा इकाइयों के विस्‍तार से यूरिया को ऊपर दर्शाए गए अनुसार न्‍यूनतम और अधिकतम मूल्‍य सहित 90% आईपीपी की मान्‍यता दी जाएगी।

 

4     पुनरुद्धार/ब्राउनफील्‍ड परियोजनाएं: यदि सार्वजनिक क्षेत्र में बंद इकाइयों का पुनरुद्धार किया जाता है तो हिन्‍दुस्‍तान फर्टिलाइजर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचएफसीएल) और फर्टिलाइजर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एफसीआईएल) की पुनरुद्धार की गई इकाइयों से प्राप्‍त यूरिया को निर्धारित न्‍यूनतम और अधि‍कतम मूल्‍य सहित 95% आपीपी की मान्‍यता दी जाएगी।

 

1.    ग्रीनफील्‍ड परियोजनाएं : ग्रीनफील्‍ड परियोजनाओं के मूल्‍य-निर्धारण पर निर्णय बोली प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा जो प्रस्‍तावित नए संयंत्रों के स्‍थल (राज्‍यों) की पुष्टि होने के बाद आईपीपी पर छूट होगी।

 

1.    गैस परिवहन प्रभार: विनियंत्रक (गैस) द्वारा यथा निर्धारित वास्‍तविक आंकड़ों (यूरिया के प्रति मी.टन 5.2 जी.कैलोरी तक) के आधार पर विस्‍तार और पुनरुद्धार का कार्य करने वाली इकाइयों को अतिरिक्‍त गैस परिवहन लागत का भुगतान किया जाए बशर्ते कि यूरिया की अधिकतम सीमा 25 अमेरिकी डॉलर प्रति मी.टन हो।

 

1.    गैस का आबंटन: यूरिया क्षेत्र में नए निवेश के लिए केवल गैर-एपीएम गैस पर विचार किया जाएगा।

 

1.    कोयला गैसीकरण आधारित यूरिया परियोजनाएं:  कोयला गैसीकरण आधारित यूरिया परियोजनाओं को ब्राउनफील्‍ड या गैसफील्‍ड परियोजना, जैसी भी स्‍थिति हो, के समान माना जाना चाहिए। इसके अलावा, कोयला गैसीकरण प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा दिया जाने वाला कोई अन्‍य प्रोत्‍साहन या कर लाभ इन परियोजनाओं को भी दिया जाएगा।

 

1.    विदेशों में संयुक्‍त उद्यम: गैस सम्‍पन्‍न दूसरे देशों में संयुक्‍त उद्यम को विद्यमान बाजार स्‍थितियों और संयुक्‍त उद्यम कंपनी के साथ परस्‍पर विचार-विमर्श के आधार पर निर्णीत मूल्‍य के साथ सुनिश्‍चित उठान करारों के माध्‍यम से बढ़ावा दिया जाना प्रस्‍तावित है। तथापि, अधिकतम मूल्‍य के निर्णय का सिद्धांत प्रति मी.टन 405 अमेरिकी डॉलर सीआईएफ भारत और प्रति मी.टन 225 अमेरिकी डॉलर सीआईएफ भारत के न्‍यूनतम (हैंडलिंग और बैगिंग लागत सहित) के साथ ग्रीनफील्‍ड परियोजनाओं के अंतर्गत प्राप्‍त मूल्‍य (ग्रीनफील्‍ड परियोजना की अनुपस्‍थिति में) या पुनरुद्धार परियोजनाओं के लिए यथा प्रस्‍तावित आईपीपी के 95% के अंतर्गत प्राप्‍त मूल्‍य हो सकता है।

 

10.   प्रस्‍तावित निवेश नीति के लिए समयावधि: नई नीति की अधिसूचना जारी होने से चार वर्षों के अंदर अतिरिक्‍त क्षमताओं का उत्‍पादन शुरू करने वाली पुनरुत्‍थान परियोजनाएं ही इस छूट की पात्र होगी। इसी तरह, केवल विस्‍तार और पुनरुद्धार (ब्राउनफील्‍ड) इकाइयों के उत्‍पादन, जो नई नीति की अधिसूचना के पॉंच वर्षों के भीतर होते हैं, इस नीति में प्रदत छूट के लिए पात्र होंगे। यदि इस समय-सीमा के भीतर उत्‍पादन शुरू नहीं होता है, तो ऐसे ब्राउनफील्‍ड परियोजनाओं को ग्रीनफील्‍ड परियोजना के समान माना जाएगा, जिसमें मूल्‍य का निर्धारण सीमित बोली विकल्‍पों के जरिए होगा। नई नीति के अंतर्गत नए संयुक्‍त उद्यमों की स्‍थापना की समयावधि भी पांच वर्ष रखी जाएगी।

 

(ख)   नई निवेश नीति-2012 

 

      भारत सरकार ने 02 जनवरी, 2013 को नई निवेश नीति को अधिसूचित किया है जिसका उद्देश्‍य यूरिया उत्‍पादन में भारत की आयात निर्भरता को कम करके भविष्‍य में यूरिया क्षेत्र में नए निवेश को बढ़ावा देना है। 

 

नई निवेश नीति 2012 की महत्‍वपूर्ण विशेषताएं:- 

 

  • केवल गैस आधारित संयंत्रों को समर्थन।

 

  • लचीले न्‍यूनतम तथा अधिकतम मूल्‍य का ढांचा 6.5 अमेरिकी डॉलर से 14/एमएमबीटीयू तक गैस के सुपुर्दगी मूल्‍य पर गिना जाता है।

 

  • न्‍यूनतम मूल्‍य 12% के साम्‍या के प्रतिलाभ (आरओई) पर तथा अधिकतम मूल्‍य 20% के आरओई पर निर्धारित किया गया है।

 

  • ग्रीनफील्‍ड/पुनरुद्धार तथा ब्राउनफील्‍ड परियोजनाओं के लिए न्‍यूनतम एवं अधिकतम, सुपुर्दगी गैस मूल्‍य क्रमबद्ध रूप से बढ़ेगा अर्थात् गैस के मूल्‍य में प्रत्‍येक अमेरिकी डॉलर 0.1/एमएमबीटीयू की वृद्धि न्‍यूनतम तथा अधिकतम को गैस के मूल्‍य 2/मी.टन अमेरिकी डॉलर से 14/एमएमूबीटीयू अमेरिकी डॉलर तक बढ़ा देगी।

 

  • 14/एमएमबीटीयू अमेरिकी डॉलर के गैस मूल्‍य के बाद केवल न्‍यूनतम बढ़ेगा।

 

  • पुनरुत्‍थान परियोजनाओं के लिए न्‍यूनतम एवं अधिकतम को 7.5/एमएमबीटीयू अमेरिकी डॉलर के सुपुर्द गैस मूल्‍य से जोड़ा गया है और 0.1/एमएमबीटीयू के सुपुर्द गैस मूल्‍य में प्रत्‍येक वृद्धि के लिए न्‍यूनतम तथा अधिकतम 2.2/मी.टन तक बढ़ जाएगा।

 

  • बन्‍द इकाई के पुनरुद्धार का समर्थन।

 

  • साधन संपन्‍न देशों में संयुक्‍त उद्यम लगाने के लिए भारतीय उद्योग के निवेश हेतु प्रोत्‍साहित करना।

 

  • दानेदार या लेपित/पुष्‍ट यूरिया के रूप में यूरिया उत्‍पादन के लिए इकाइयों को, न्‍यूनतम तथा अधिकतम मूल्‍यों में 10/मी.टन अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्‍त राशि की अनुमत के साथ यूरिया के प्रयोग की दक्षता सुधारने के लिए प्रोत्‍साहन देना।

 

  • उत्‍तर पूर्व राज्‍यों में इकाइयों के लिए गैस मूल्‍य के संबंध में विशेष छूट, जो भारत सरकार/राज्‍य सरकार द्वारा दी जा रही है, किसी भी नए निवेश पर उपलब्‍ध होगी। यदि सुपुर्दगी मूल्‍य (विशेष छूट की अनुमति के बाद) 6.5 अमरिकी डॉलर/एमएमबीटीयू के नीचे जाता है तो न्‍यूनतम तथा अधिकतम मूल्‍य के लिए उचित समायोजन लागू होगा जोकि वित्‍त मंत्रालय के अनुमोदन के अधीन है।

 

  • यह नीति अधिसूचना की तारीख से पांच वर्ष के अंदर उत्‍पादन शुरू करने वाली सभी इकाइयों पर लागू तथा गारंटीकृत वापसी खरीद की छूट उत्‍पादन के प्रारंभ करने की तारीख से 8 वर्ष के लिए लागू होगी।

 

(।)    एनआईपी-2012 में संशोधन

 

      माननीय प्रधानमंत्री के निजी सचिव की अध्‍यक्षता में 1.7.2013 को हुई बैठक में हुए विचार-विमर्श के अनुसार सीसीईए के जरिए नई निवेश नीति-2012 में ''गांरटीकृत वापसी खरीद'' के स्‍थान पर उचित सुरक्षा मानकों के साथ अद्यतन घरेलू बिक्री पर राजसहायता दी जाएगा’ रखने के संशोधन करने का निर्णय लिया गया।

 

      इस विभाग ने एनआईपी-2012 में संशोधन 7 अक्‍तूबर, 2014 को जारी कर दिया है। इस संबंध में इस विभाग को परियोजना प्रस्‍तावकों से 12 प्रस्‍ताव प्राप्‍त हुए हैं। इसके अतिरिक्‍त, यह विभाग इन प्रस्‍तावों को, एनआईपी-2012 और उसके संशोधनों के आलोक में जांच रहा है।

 


(।।।)   नियंत्रणमुक्त फास्‍फेटयुक्त और पोटाशयुक्‍त (पीएंडके)  उर्वरकों के लिए राजसहायता नीति 

 

1.    ऐतिहासिक पृष्‍ठभूमि

 

1.1   स्‍वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही भार‍त सरकार उर्वरक की बिक्री, मूल्‍य तथा गुणवत्‍ता विनियमित करती रही है। इस प्रयोजन से भारत सरकार ने वर्ष 1957 में आवश्‍यक वस्तु अधिनियम (ईसी एक्ट) के अन्तर्गत उर्वरक नियंत्रण आदेश (एफसीओ) पारित किया। वर्ष 1977 तक उर्वरकों पर पोटाश के सिवाय किसी प्रकार की राजसहायता नही दी जाती थी। पोटाश पर भी केवल 1977 में ही राजसहायता दी गई थी।

 

 

1.2   मराठा समिति की सिफारिशों पर सरकार ने नवम्बर, 1977 में नाइट्रोजनयुक्‍त उर्वरकों के लिए प्रतिधारण मूल्य स्कीम (आरपीएस) लागू की थी। बाद में, फरवरी, 1979 से इसे फास्फेटयुक्त और अन्य मिश्रित उर्वरकों पर भी लागू किया गया और 1982 से इसे एकल सुपर फास्फेट पर भी लागू किया जो 1991 तक जारी रहा। बाद में राजसहायता को आयातित फास्फोटयुक्त और पोटाशयुक्‍त उर्वरकों पर भी लागू किया गया।

 

      1990 के दशक के आरम्भ के वर्षों में देश अत्याधिक राजकोषीय घाटे का सामना कर रहा था और विदेशी मुद्रा संकट गहराने का भी खतरा था। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने जुलाई, 1991 में उर्वरकों के मूल्य में 40 प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की। कुछेक उर्वरक जो राजसहायता स्कीम के अन्तर्गत थे उन्हें नियंत्रणमुक्त कर दिया गया। तत्‍पश्‍चात् उर्वरकों के ऊंचे मूल्यों को देखते हुए उनके कम उपभोग की आशंका होने तथा परिणामस्वरूप कम कृषि उत्पादकता होने पर सरकार ने यूरिया के मूल्यों में 10 प्रतिशत वृद्धि वापस ले ली।

 

1.3   दिसम्बर, 1991 में, सरकार ने उर्वरकों के विभिन्‍न उत्‍पादकों के लिए प्रतिधारणीय मूल्यों के परिकलन की विद्यमान विधियों की समीक्षा करने और राजकोष पर बिना भार डाले उर्वरकों के मूल्यों को घटाने के बारे में सुझाव देने के लिए उर्वरक मूल्यों पर एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी)  का गठन किया। जेपीसी ने 20 अगस्त, 1992 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। समिति के मुख्य निष्‍कर्ष और सिफारिशें यह थीं कि राजसहायता में वृद्धि का मुख्य कारण आयातित उर्वरकों की लागत में वृद्धि, जुलाई, 1991 में रूपए का अवमूल्यन और 1980 से 1991 तक स्थिर फार्मगेट मूल्य है। समिति उर्वरकों को पूर्णत: नियंत्रणमुक्त रखने के पक्ष में नहीं थी और समिति ने आयातित फास्फेटयुक्त व पोटाशयुक्‍त उर्वरकों को नियंत्रणमुक्त करने के साथ यूरिया के उपभोक्ता मूल्य में 10 प्रतिशत की मामूली कटौती करने की सिफारिश की।

 

 

 

2.    पीएण्‍डके उर्वरकों के लिए रियायत योजना 

 

2.1   जेपीसी की सिफारिशों के आधार पर, भारत सरकार ने सभी फास्फेटयुक्त और पोटाशयुक्‍त (पी एंड के) उर्वरकों नामत: डीएपी, एमओपी, एनपीके मिश्रित उर्वरक और एसएसपी को 25 अगस्त, 1992 से नियंत्रणमुक्त कर दिया जो 1977 से प्रतिधारण मूल्‍य योजना (आरपीएस) के अधीन थे जबकि यूरिया को आरपीएस के अधीन ही रखा गया। चूंकि, नाइट्रोजनयुक्‍त उर्वरकों (यूरिया) पर सहायता जारी रखी गई जबकि फास्फेटयुक्त उर्वरकों को नियंत्रणमुक्त कर दिया गया जो फास्फेटयुक्त उर्वरकों के मूल्य बाजार में अपेक्षाकृत अधिक हो गए। परिणामस्वरूप, नाइट्रोजनयुक्‍त उर्वरकों का उत्पादन और उपभोग बढ़ गया और पीएंडके उर्वरकों का उपयोग घट गया। परिणामस्वरूप नाइट्रोजनयुक्‍त, फास्फोटयुक्त और पोटाशयुक्‍त उर्वरकों के उपभोग में काफी असंतुलन पैदा हो गया। मृदा की उर्वरकता में असन्तुलन और फास्फेटयुक्त तथा पोटाशयुक्‍त उर्वरक मूल्यों में वृद्धि के कारण उर्वरकों को वहन न कर पाने की आशंका से भारत सरकार ने मूल्य वृद्धि के प्रभाव को कम करने और संतुलित उर्वरकता को प्रोत्‍साहित करने के लिए रबी 1992 से फास्फेटयुक्त और पोटाशयुक्‍त उर्वरकों के लिए तदर्थ रियायत की घोषणा की।

 

2.2   पीएण्‍डके उर्वरकों के लिए रियायती योजना का मुख्‍य प्रयोजन/उद्देश्‍य किसानों को वहनीय मूल्‍य पर पीएण्‍डके उर्वरक उपलब्‍ध कराना है ताकि उर्वरकों के संतुलित प्रयोग के माध्‍यम से देश में खाद्य उत्‍पादकता में वृद्धि की जा सके। रियायत योजना का उद्देश्‍य उर्वरक क्षेत्र में उद्यमियों द्वारा किए गए निवेश पर उचित दर पर प्रतिलाभ सुनिश्‍चित करना भी था।

 

2.3   आरम्भ में तदर्थ रियायत स्कीम डीएपी, एमओपी और एनपीके मिश्रित उर्वरकों पर लागू की गई थी। बाद में इस स्कीम को 1993-94 से एसएसपी पर भी लागू कर दिया गया। रियायतों का वितरण 1992-93 से 1993-94 तक कृषि एवं सहकारिता विभाग द्वारा प्रदान किये गए अनुदानों के आधार पर राज्य सरकारों द्वारा विनिर्माताओं/आयातकों को किया जाता था।

 

2.4   1997-1998 में कृषि व सहकारिता विभाग ने डीएपी/एनपीके/एमओपी के लिए एक अखिल भारतीय समान अधिकतम खुदरा मूल्य दर्शाना आरम्भ किया। एसएसपी के संबंध में एमआरपी दर्शाने का उत्तरदायित्व राज्य सरकारों का था। जम्मू व कश्मीर तथा पूर्वोत्तर राज्यों के दुर्गम क्षेत्रों में उर्वरकों की आपूर्ति के लिए विशेष भाड़ा राजसहायता प्रतिपूर्ति स्कीम 1997 में लागू की गई थी जो 31.3.2008 तक जारी रही। उर्वरकों की कुल सुपुर्दगी लागत सरकार द्वारा दर्शायी गई एमआरपी से निरपवाद रूप से अधिक रही, फार्म गेट पर उर्वरकों के सुपुर्दगी मूल्य और एमआरपी में अन्तर की क्षतिपूर्ति सरकार द्वारा विनिर्माताओं/आयातकों को राजसहायता के रूप में की जाती थी।

 

2.5   30 सितम्‍बर, 2000 तक, उर्वरक राजसहायता संबंधी मामले डीएसी द्वारा देखे जाते थे और उसके बाद ये मामले उर्वरक विभाग द्वारा, समय-समय पर परिवर्तित पैरामीटरों के अनुरूप, देखे जाते रहे। पीएण्‍डके उर्वरको की एमआरपी 28 फरवरी, 2002 को संशोधित की गई जो डीएपी और एमओपी के मामले में 31.03.2010 तक जारी रही। लेकिन मिश्रित उर्वरकों के मामले में एमआरपी 18 जून, 2008 को संशोधित की गई।

 

2.6   30 अप्रैल, 2008 तक एसएसपी की एमआरपी की घोषणा संबंधित राज्‍य सरकारों द्वारा की जाती थी जिसे 01;05.2008 से 30;09.2009 तक की अवधि के लिए अखिल भारतीय आधार पर समान रूप से 3400 रुपए/मी.टन की दर से उर्वरक विभाग द्वारा घोषित किया गया और एसएसपी पर राजसहायता का निर्धारण लागत लेखाशाखा से प्राप्‍त रिपोर्ट के आधार पर, उर्वरक विभाग द्वारा मासिक आधार पर किया जाता था। एसएसपी की एमआरपी 1.10.2009 से 30.4.2010 तक खुली छोड़ दी गई और एसएसपी पर 2000 रूपए प्रति मी.टन की नियत राजसहायता दी गई।

 

3.    रियायत स्कीम के अन्तर्गत पीएंडके उर्वरक राजसहायता की संगणना 

 

3.1   पीएंडके उर्वरकों पर राजसहायता की संगणना औद्योगिक लागत और मूल्य ब्यूरो (बीआईसीपी), जिसे अब टैरिफ आयोग (टीसी) कहते हैं, द्वारा डीएपी और एमओपी पर किए गए लागत मूल्य अध्ययन पर आधारित थी। 1.4.1999 से राजसहायता दरें तिमाही आधार पर लागत सह दृष्टिकोण पर निर्धारित की जाती थीं। उर्वरकों की कुल सुपुर्दगी लागत सरकार द्वारा निर्धारित एमआरपी से ऊंची ही रही, फार्म गेट स्तर पर उर्वरकों की सुपुर्दगी मूल्य और एमआरपी के बीच के अंतर की क्षतिपूर्ति सरकार द्वारा राजसहायता के रूप में की जाती थी।

 

3.2   मिश्रित उर्वरकों पर राजसहायता की गणना के लिए सरकार ने 1.4.2002 से टीसी की सिफारिश पर नई प्रणाली लागू की। मिश्रित उर्वरक निर्माताओं को नाइट्रोजन यानी गैस और नेफ्था, फीड स्टाक के आधार पर दो वर्गों में बांटा गया। कुछ समय बाद, डीएपी उद्योग ने फास्फोटयुक्त अम्ल उत्पादन के लिए रॉक फास्‍फेट जैसे भिन्न कच्चे माल का प्रयोग करना शुरू कर दिया। डीओएफ ने एक प्रस्ताव बनाया और सुझाव दिया कि फास्फोरिक अम्ल मूल्य को अन्तर्राष्ट्रीय डीएपी मूल्य से सम्बद्ध कर दिया जाए। मामले को प्रो. अभिजीत सेन की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ ग्रुप को भेज दिया गया। इस ग्रुप की रिपोर्ट अक्तूबर, 2005 में प्रस्तुत की गई और उस पर अन्तर-मंत्रालयीन ग्रुप द्वारा विचार किया गया। टीसी ने डीएपी/एमओपी और एनपीके मिश्रित का नए सिरे से लागत मूल्य अध्ययन कराया और दिसम्बर, 2007 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस टीसी रिपोर्ट के आधार पर 31.3.2010 तक राजसहायता का आकलन मासिक आधार पर किया जाता था।

 

4.    रियायती योजना के अंतर्गत पीएण्‍डके उर्वरकों की एमआरपी 

 

      सरकार द्वारा एमआरपी को 1.4.1997 से नियत किया गया था और सरकार द्वारा 1997 से 31.3.2010 के दौरान नियत की गई एमआरपी का उल्‍लेख निम्‍नलिखत सारणी में किया गया है:-

 

पीएण्‍डके उर्वरकों का अधिकतम खुदरा मूल्‍य (एमआरपी)              (रुपए में प्रति मी.टन)

#

उर्वरक ग्रेड

1.4.97

29.2.00

28.2.02

28.2.03

12.3.03

18.6.08

28.2.00

27.2.02

27.2.03

11.3.03

17.6.08

31.3.10

1

डीएपी : 18-46-0-0

8300

8900

9350

9550

9350

9350

2

एमएपी : 11-52-0-0

 लागू नहीं

लागू नहीं 

 लागू नहीं

लागू नहीं 

 लागू नहीं

9350

3

टीएसपी : 0-46-0-0

 लागू नहीं

लागू नहीं 

 लागू नहीं

लागू नहीं 

 लागू नहीं

7460

4

एमओपी : 0-0-60-0

3700

4255

4455

4455

4455

4455

5

16-20-0-13

6400

6740

7100

7300

7100

5875

6

20–20–0-13

 लागू नहीं

लागू नहीं 

 लागू नहीं

लागू नहीं 

 लागू नहीं

6295

7

23–23–0-0

 लागू नहीं

लागू नहीं 

 लागू नहीं

लागू नहीं 

 लागू नहीं

6145

8

10–26–26-0

7300

7880

8360

8560

8360

7197

9

12–32–16-0

7400

7960

8480

8680

8480

7637

10

14–28–14-0

7300

7820

8300

8500

8300

7050

11

14–35–14-0

7500

8100

8660

8860

8660

8185

12

15–15–15-0

6000

6620

6980

7180

6980

0

13

एएस : 20.3-0-0-23

 लागू नहीं

लागू नहीं 

 लागू नहीं

लागू नहीं 

 लागू नहीं

10350

14

20-20-0-0

6500

6880

7280

7480

7280

5343

15

28–28–0-0

8000

8520

9080

9280

9080

7481

16

17–17–17-0

7200

7680

8100

8300

8100

5804

17

19–19–19-0

7300

7840

8300

8500

8300

6487

18

एसएसपी(0-16-0-11)

अप्रैल, 2008 तक एमआरपी का नियतन संबंधित राज्‍य सरकारों द्वारा किया गया था।

1.5.2008 से 30.09;2009 तक अखिल भारतीय एमआरपी 3400 पीएमटी सरकार द्वारा नियत की गई थी। 1;10;2009 से अप्रैल, 2010 तक एसएपी इकाइयों को एमआरपी नियतन की छूट थी।

 

 

 

 

 

 

 

5     रियायत योजना का प्रभाव: 

5.1   पीएण्‍डके उर्वरकों का एमआरपी सुपुर्दगी लागत से काफी कम था। इसके पिछले तीन दशकों के दौरान उर्वरकों की खपत बढ़ी और परिणामस्‍वरूप देश में खाद्यान्‍न उत्‍पादन भी बढ़ा। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में देखा गया कि देश के अतिरिक्‍त उर्वरक उपयोग से कृषि उत्‍पादकता में मामूली सा फर्क पड़ा जिससे कृषि उत्‍पादकता और परिणामी कृषि उत्‍पादन में लगभग स्थिरता आ गई। असंगत एनपीके उपयोग से बहु-पोषकतत्‍वों की कमी में बढ़ोतरी हुई और जैविक खाद के उपयोग में कमी के कारण मृदा कार्बन घटक में कमी आई जिससे कृषि उत्‍पादकता में स्थिरता आ गई। उर्वरक क्षेत्र ने काफी नियंत्रित वातावरण में काम किया जहां उत्‍पादन लागत और बिक्री मूल्‍य भारत सरकार द्वारा निर्धारित किए जाते थे। इस कारण अन्‍य क्षेत्रों की तुलना में उर्वरक उद्योग को कम लाभ प्रदता का सामना करना पड़ा। पिछले 11 वर्षों से यूरिया क्षेत्र में और लगभग आठ वर्षों से पीएण्‍डके क्षेत्र में निवेश न होने के कारण उर्वरक उद्योग के विकास में स्थिरता आ गई। आधुनिकीकरण और दक्षता बढ़ाने के लिए उर्वरक उद्योग को कोई प्रोत्‍साहन नहीं मिलता। उर्वरक क्षेत्र में नए उत्‍पाद भी प्रभावित हुए क्‍योंकि राजसहायता प्राप्‍त उर्वरकों से मूल्‍य के कारण पिछड़ने से उर्वरक कंपनियों द्वारा बहुत कम उत्‍पाद शुरू किए गए। उद्योग को खराब कृषि विस्‍तार सेवाओं जो कि किसानों को आधुनिक उर्वरक उपयोग तकनीकों मृदा स्‍वास्‍थ्‍य के बारे में शिक्षित करने और मृदा एवं फसल विशिष्‍ट उर्वरकों के मृदा परीक्षण के आधार पर उपयोग को प्रोत्‍साहित करने के लिए आवश्‍यक थी, के कारण किसानों पर ध्‍यान केन्द्रित करने के लिए बढ़ावा नहीं मिला।

5.2    रियायत योजना के तहत पिछले पांच वर्षों (2005-06 से 2009-10) के दौरान सरकार के राजसहायता व्‍यय में 500% की वृद्धि भी हुई जिसमें लगभग 94% वृद्धि उर्वरक एवं उर्वरक आदानों के अंतर्राष्‍ट्रीय मूल्‍यों में वृद्धि के कारण और केवल 6% वृद्धि खपत में बढ़ोतरी के कारण हुई। 

 

5.3   इस प्रकार यह पाया गया कि पिछले कुछ वर्षों से उत्‍पाद आधारित राजसहायता व्‍यवस्‍था (पूर्व रियायत योजना) सभी पणधारियों यथा किसानों, उद्योग और सरकार के लिए घाटे का सौदा रही। तदनुसार कृषि उत्‍पादकता, संतुलित उर्वरण और स्‍वदेशी उर्वरक उद्योग की वृद्धि, उर्वरक कंपनियों के बीच प्रतिस्‍पर्धा और रियातय योजना की कमियों से निपटने से संबंधित सभी मुद्दें पर विचार करने के बाद सरकार ने 1.4.2010 से पीएण्‍डके उर्वरकों के लिए पोषक तत्‍व आधारित राजसहायता (एनबीएस) नीति शुरू की।   ‍       

 

6.    पोषक तत्‍व आधारित राजसहायता (एनबीएस) नीति (1.4.2010 से लागू):

 

6.1   विभाग 1.4.2010 से पीएण्‍डके उर्वरकों के लिए एनबीएस नीति कार्यान्वित कर रहा है। एनबीएस नीति के तहत सरकार ने पोषक तत्‍वों नामत: नाइट्रोजन (एन), फास्‍फेट (पी), पोटाश (के) और सल्‍फर (एस) के लिए वार्षिक आधार पर राजसहायता (रुपये प्रति किग्रा आधार पर) की नियत दर घोषित की एनबीएस नीति की। मुख्‍य विशेषताएं निम्‍न प्रकार हैं: 

 

  • सचिव (उर्वरक) की अध्‍यक्षता में और कृषि और सहकारिता विभाग (डीएसी)/व्‍यय विभाग (डीओई), योजना आयोग और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के संयुक्‍त सचिव स्‍तर के प्रतिनिधियों वाली एक अंतर-मंत्रालयीन समिति (आईएमसी) गठित की गई है। यह समिति वित्‍तीय वर्ष शुरू होने से पहले ‘एन’, ‘पी’, ‘के’ और एस के लिए पोषक तत्‍व राजसहायता संस्‍तुत करती है ताकि सरकार (उर्वरक विभाग) इस पर निर्णय ले सकें। आईएमसी द्धितीयक एवं सूक्ष्‍म पोषक तत्‍व वाले संपुष्‍ट राजसहायता प्राप्‍त उर्वरकों पर प्रति टन अतिरिक्‍त राजसहायता संस्‍तुत करती है। समिति विनिर्माताओं/आयातकों के आवेदन के आधार पर राजसहायता व्‍यवस्‍था के तहत नए उर्वरकों को शामिल करने की संस्‍तुति करती है और सरकार के निर्णय के लिए इस पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आईसीएआर) के अनुमोदन की आवश्‍यकता है।  
  • एन, पी, के, एस पोषक तत्‍वों पर प्रति किग्रा. राजसहायता दरों को एनबीएस नीति के तहत शामिल किए गए विभिन्‍न पीएण्‍डके उर्वरकों पर प्रति टन राजसहायता में परिवर्तित किया गया है।
  • प्रमुख पोषक तत्‍वों के साथ सूक्ष्‍म पोषक तत्‍वों के उपयोग को प्रोत्‍साहित करने के लिए बोरोन और जिंक सूक्ष्‍म पोषकतत्‍वों वाले राजसहायता योजना के तहत शामिल किए गए उर्वरकों का कोई भी प्रकार अलग से प्रति टन राजसहायता का पात्र है। 
  • वर्तमान में पीएण्‍डके उर्वरकों नामत: डीएपी, एमएपी, टीएसपी, एमओपी, अमोनियम सल्‍फेट, एसएसपी के 22 ग्रेड ओर एनपीकेएस मिश्रित उर्वरकों के 16 ग्रेड एनबीएस नीति के तहत शामिल किए गए है।
  • एनबीएस व्‍यवस्‍था के तहत, पीएण्‍डके उर्वरकों का एमआरपी खुला रखा गया है और उर्वरक विनिर्माताओं/विपणनकर्त्‍ताओं को उचित दरों पर एमआरपी नियत करने की अनुमति है। वास्‍तव में घरेलू मूल्‍य मांग आपूर्ति प्रणाली द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।  
  • तैयार उर्वरकों, उर्वरक आदानों के आयात एवं स्‍वदेशी इकाइयों द्वारा उत्‍पादन के साथ उर्वरकों के वितरण एवं संचलन की निगरानी आनलाइन वेब आधारित ‘’उर्वरक निगरानी तंत्र (एफएमएस)’’ के जरिए की जाती है जैसा कि रियायत योजना के तहत पीएण्‍डके उर्वरकों के लिए किया जा रहा था।
  • भारत में उत्‍पादित/आयातित नियंत्रणमुक्‍त उर्वरकों का 20% आवश्‍यक वस्‍तु अधिनियम 1955 (ईसीए) के अंतर्गत संचलन नियंत्रण में रखा गया है। उर्वरक विभाग कम आपूर्ति वाले क्षेत्रों में आपूर्ति को पूरा करने के लिए इन उर्वरकों के संचलन को नियंत्रित करता है।
  • एनबीएस के साथ, रेल और सड़कमार्ग के द्वारा नियंत्रणमुक्‍त उर्वरकों के संचलन और वितरण के लिए मालभाड़ा उपलब्‍ध कराया जा रहा है ताकि देश में सूदूरवर्ती क्षेत्रों में उर्वरकों की व्‍यापक उपलब्‍धता हो।
  • मिश्रित उर्वरकों समेत सभी राजसहायता प्राप्‍त पीएण्‍डके उर्वरकों के आयात को खुले सामान्‍य लाइसेंस (ओएलजी) के तहत रखा गया है। आयातित सल्‍फेट को छोड़कर आयातित मिश्रित उर्वरकों के लिए एनबीएस उपलब्‍ध है। हालांकि अमोनियम सल्‍फेट (एएस) के मामले में मैसर्स फैक्‍ट के घरेलू उत्‍पादन के लिए ही एनबीएस लागू होती है।      
  • यूरिया को छोड़कर राजसहायता प्राप्‍त उर्वरकों के बाजार मूल्‍य मांग-आपूर्ति के आधार पर निर्धारित होते है, उर्वरक कंपनियों को उर्वरक बैगों पर स्‍पष्‍ट रूप से लागू राजसहायता के साथ खुदरा मूल्‍य (आरपी) मुद्रित करना आवश्‍यक होता है। मुद्रित एमआरपी से ज्‍यादा पर बिक्री करना ईसी अधिनियम के तहत दण्‍डनीय है।
  • कस्‍टमाइज्‍ड उर्वरकों और मिश्रित उर्वरकों के विनिर्माताओं को कृषि उद्देश्‍य के लिए कस्‍टमाइज्‍ड उर्वरकों और मिश्रित उर्वरक बनाने के लिए आदान रूप में राजसहायता प्राप्‍त उर्वरक जिले में पहुंचने के बाद विनिर्माताओं/आयातकों से लेने की अनुमति है। हालांकि कस्‍टमाइज्‍ड उर्वरकों और मिश्रित उर्वरकों की बिक्री पर अलग से कोई राजसहायता उपलब्‍ध नहीं कराई जाती।              
  • ‘एन’ के उत्‍पादन की उच्‍च लागत की क्षतिपूर्ति के लिए नेफ्था आधारित केप्टिव अमोनिया का उपयोग करते हुए मिश्रित उर्वरकों का उत्‍पादन करने वाले स्‍वदेशी विनिर्माताओं को 1.4.2010 से 31.3.2012 तक दो वर्षों की अधिकतम अवधि के लिए अलग से अतिरिक्‍त राजसहायता भी उपलब्‍ध कराई जाती है जिस दौरान इकाइयों को गैस में परिवर्तित करना अथवा फीडस्‍टॉक के रूप में आयातित अमोनिया का उपयोग आवश्‍यक होता है। प्रशुल्‍क आयोग के अध्‍ययन और संस्‍तुतियों के आधार पर डीओई के परामर्श से उर्वरक विभाग अतिरिक्‍त राजसहायता को निश्चित करता है।            
  • एनबीएस उर्वरक उद्योग के जरिए किसानों तक पहुंचती है। विभाग द्वारा अधिसूचित प्रक्रिया के अनुसार पीएण्‍डके उर्वरकों के विनिर्माताओं/आयातकों को एनबीएस की अदायगी की जाती है।

 

6.2   वर्ष 2010-11 से 2014-15 के दौरान सरकार द्वारा घोषित पीएण्‍डके उर्वरकों के विभिन्‍न ग्रेड पर प्रति किग्रा एनबीएस दर और प्रति मीट्रिक टन राजसहायता निम्‍न प्रकार है:     

 

2010-11 से 2014-15 के लिए पोषक तत्‍वों एनपीकेएस के लिए प्रति किग्रा. एनबीएस दरें (रुपये प्रति किग्रा. में) 

पोषक तत्‍व

1st  अप्रैल - 31st  दिसम्‍बर  2010 *

1st  जनवरी- 31st  मार्च 2011**

2011-12

2012-13

2013-14

2014-15

‘एन’ (नाइट्रोजन)

23.227

23.227

27.153

24.000

20.875

20.875

‘पी’ (फॉस्‍फेट)

26.276

25.624

32.338

21.804

18.679

18.679

‘के’ (पोटाश)

24.487

23.987

26.756

24.000

18.833

15.500

‘एस’ (सल्‍फर)

1.784

1.784

1.677

1.677

1.677

1.677

 

* रैक बिंदु से खुदरा बिंदुओं तक द्वितीयक मालभाडे के लिए 300 रुपये प्रति मी.टन सहित

** 300 रुपये/प्रति मी.टन के द्वितीयक मालभाडे को छोड़कर, जो प्रति टन कि.मी. आधार पर  अलग से दिया जा रहा है।

 

 

 

वर्ष 2010-11 से 2014-15 के दौरान पीएण्‍डके उर्वरकों के विभिन्‍न ग्रेड पर प्रति मी.टन राजसहायता (रुपये प्रति मी.टन में) 

क्रम सं

उर्वरक ग्रेड (एफजी) (एनपीकेएस पोषक तत्‍व)

2010-11

2011-12

 

2012-13

 

 

1.4.2010 से 31.12.2010 तक

1.1.2011 से 31.3.2011 तक

2013-14

2014-15

 

  1.  

डीएपी     (18-46-0-0)

16268

15968

19763

14350

12350

12350

2.   

एमएपी     (11-52-0-0)

16219

15897

19803

13978

12009

12009

3.   

टीएसपी      (0-46-0-0)

12087

11787

14875

10030

8592

8592

4.   

एमओपी     (0-0-60-0)

14692

14392

16054

14400

11300

9300

5.   

एसएसपी      (0-16-0-11)

4400

4296+200

5359

3676

3173

3173

6.   

16-20-0-13

9203

9073

11030

8419

7294

7294

7.   

20-20-0-13

10133

10002

12116

9379

8129

8129

8.   

20-20-0-0

9901

9770

11898

9161

7911

7911

9.   

28-28-0-0

13861

11678

16657

12825

11075

11075

10.   

10-26-26-0

15521

15222

18080

14309

11841

10974

11.   

12-32-16-0

15114

14825

17887

13697

11496

10962

12.   

14-28-14-0

14037

13785

16602

12825

10789

10323

13.   

14-35-14-0

15877

15578

18866

14351

12097

11630

14.   

15-15-15-0

11099

10926

12937

10471

8758

8258

15.   

17-17-17-0

12578

12383

14662

11867

9926

9359

16.   

19-19-19-0

14058

13839

16387

13263

11094

10460

17.   

अमोनियम सल्‍फेट 

 (20.6-0-0-23)

5195

5195

5979

5330

 

4686

4686

18.   

16-16-16-0 (1.7.2010 से)

11838

11654

13800

11169

9342

8809

19.   

15-15-15-9 ( 1.10.2010 से)

11259

11086

13088

10622

8909

8409

20.   

24-24-0-0 (1.10.10 से 29.5.12 तक और 22.6.2012 से)

11881

11724

14278

10993

9493

9493

21.   

डीएपी लाइट (16-44-0-0) (1.2.11से)

लागू नहीं

14991

18573

13434

11559

11559

22.   

24-24-0-8 (12.11.13 से 14.2.15)  सल्‍फर पर राजसहायता के बिना

लागू नहीं

लागू नहीं

लागू नहीं

लागू नहीं

9493

9493

23.   

23-23-0-0 (22.6.2012 तक)

11386

11236

13686

10535

लागू नहीं

लागू नहीं

24.   

डीपीए 4 सल्‍फर 25.2.13 से 7.11.13तक) (राजसहायता के बिना).

लागू नहीं

लागू नहीं

लागू नहीं

14350

12350

लागू नहीं

25.   

डीएपी लाइट-II(14-46-0-0)

30.8.2011 से 29.8.2012 तक)

लागू नहीं

लागू नहीं

18677

13390

लागू नहीं

लागू नहीं

26.   

एमएपी लाइट (11-44-0-0)

30.8.2011 से 29.8.2012 तक)

लागू नहीं

लागू नहीं

17276

12234

लागू नहीं

लागू नहीं

27.   

13-33-0-6

30.8.2011 से 29.8.2012 तक)

लागू नहीं

लागू नहीं

14302

10416

लागू नहीं

लागू नहीं

 

 

 एनए का तात्‍पर्य राजसहायता व्‍यवस्‍था के तहत शामिल नहीं किया गया।

 

6.3   नेफ्था आधारित एनपीके मिश्रित उर्वरक विनिर्माण इकाइयों के लिए अतिरिक्‍त क्षतिपूर्ति:

 

      एनबीएस नीति के तहत, ‘एन’ के उत्‍पादन की उच्‍च लागत की क्षतिपूर्ति के लिए नेफ्था आधारित केप्टिव अमोनिया का उपयोग करते हुए मिश्रित उर्वरकों का उत्‍पादन करने वाले स्‍वदेशी विनिर्माताओं जैसे मैसर्स फैक्‍ट, मैसर्स एमएफएल और मैसर्स जीएनवीएफसी को अधिकतम दो वर्षों (31.3.2012 तक) की अधिकतम अवधि के लिए अलग से अतिरिक्‍त राजसहायता उपलब्‍ध कराई जा रही है जिस दौरान इकाइयों के लिए गैस में परिवर्तित करना या फीडस्‍टॉक के रूप में आयातित अमोनिया का उपयोग करना आवश्‍यक है। प्रशुल्‍क आयोग के अध्‍ययन और संस्‍तुतियों के आधार पर उर्वरक विभाग, व्‍यय विभाग के परामर्श से, अतिरिक्‍त राजसहायता की मात्रा को अंतिम रूप दिया जाएगा। उपर्युक्‍त अतिरिक्‍त क्षतिपूर्ति को केवल मैसर्स फैक्‍ट के लिए 31.03.2012 से 4.10.2013 तक बढ़ाया गया है और मैसर्स एमएफएल एवं जीएनएफवीसी के लिए 31.3.2012 के बाद अतिरिक्‍त क्षतिपूर्ति बढ़ाने का प्रस्‍ताव विभाग के विचाराधीन है। प्रशुल्‍क आयोग की रिपोर्ट को अंतिम रूप दिए जाने तक, विभाग ने मैसर्स फैक्‍ट, मैसर्स जीएनवीएफसी और मैसर्स एमएफएल के लिए अतिरिक्‍त क्षतिपूर्ति की तदर्थ दरें घोषित कर दी है जो निम्‍न प्रकार है:-    

 

कंपनी

उर्वरक उत्‍पाद

तदर्थ अतिरिक्‍त क्षतिपूर्ति की राशि अनंतिम (रुपये प्रति मी.टन में) 

 

पूर्ववर्ती  (संदर्भ दिनांक  22.10.2010 का परिपत्र) 

29.4.2011  को संशोधित( 1.4.2010 से)

16.1.2014 को फिर से संशोधित (1.4.2012 से 4.10.2013 तक)

फैक्‍ट, कोचीन

20-20-0-13 एस

2331

3121

5268

अमोनियम सल्‍फेट

(20.6-0-023)

2792

3658

6343

एमएफएल, मनाली

20-20-0-13S

4784

5434

 

विचाराधीन

17-17-17-0

4079

4640

जीएनवीएफसी,  भरूच

20-20-0-0

1914

2534

 

 

6.4   एनबीएस व्‍यवस्‍था के तहत पीएण्‍डके उर्वरकों का मूल्‍य (एमआरपी) : 

 

हमारा देश  तैयार उत्‍पाद या कच्‍ची सामग्री के लिए पोटाशयुक्‍त क्षेत्र में आयात पर पूरी तरह और फास्‍फेट क्षेत्र में आयात पर 90% तक निर्भर है। राजसहायता नियत होने के कारण, अंतर्राष्‍ट्रीय मूल्‍यों में किसी उतार चढ़ाव का प्रभाव, पीएण्‍डके उर्वरकों के घरेलू मूल्‍यों पर पड़ता है।

 

वर्ष 2010-11 से 2013-14 के दौरान पीएण्‍डके उर्वरकों के एमआरपी को दर्शाने वाला विवरण अनुलग्‍नक-1 में है।

 

 

6.5   एमआरपी का औचित्‍य:   

 

एनबीएस नीति के तहत कंपनियों को स्‍वयं एमआरपी नियत करने की अनुमति दी गई है। एनबीएस शुरू करने के पीछे उर्वरक कंपनियों के बीच प्रतिस्‍पर्धा बढ़ाने का इरादा था ताकि उचित मूल्‍यों पर बाजार में विभिन्‍न उत्‍पादों की उपलब्‍धता हो सके। तथापि, पीएण्‍डके उर्वरकों के मूल्‍यों में अत्‍याधिक वृद्धि हुई है और कंपनियों द्वारा नियत किए जा रहे मूल्‍यों की औचित्‍यता पर संदेह पैदा हुआ है। मूल्‍यों में भारी वृद्धि अतंर्राष्‍ट्रीय बाजार में कच्‍ची सामग्री/तैयार उर्वरकों के मूल्‍यों में वृद्धि, अमेरिकी डॉलर की तुलना में भारतीय रुपए का अवमूल्‍यन और संभवत: कंपनियों द्वारा अधिक लाभ मार्जिन रखने के कारण भी हुई है। इससे विभिन्‍न क्षेत्रों से आवाजें उठी हैं और इसके कारण उर्वरकों का असंतुलित प्रयोग भी हुआ है। तदनुसार, उर्वरक कंपनियों द्वारा नियत मूल्‍यों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 08.07.2011 की अधिसूचना के जरिए उर्वरक कंपनियों को एनबीएस व्‍यवस्‍था के अंतर्गत उचित स्‍तर पर पीएण्‍डके उर्वरकों के मूल्‍य नियत करने का निदेश दिया है।

 

6.5.1  तदनुसार, पीएण्‍डके उर्वरकों के मूल्‍यों के औचित्‍य को सुनिश्‍चित करने के लिए एनबीएस नीति और दरें घोषित करते समय एनबीएस नीति में 1.4.2012 से निम्‍नलिखित खण्‍ड जोड़े गए हैं:

 

(i)    सभी उर्वरक कं‍पनियों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे अपने राजसहायता दावों के साथ विहित प्रपत्र में और उर्वरक कंपनियों द्वारा नियत पीएण्‍डके उर्वरकों के एमआरपी की निगरानी के उद्देश्‍य हेतु आवश्‍यकता के अनुसार प्रमाणित लागत आंकड़े प्रस्‍तुत करें।

 

(ii)    ऐसे मामलों, जहां जांच के बाद एमआरपी की अनुपयुक्‍तता सिद्ध   हो जाती है और जहां उत्‍पादन या अर्जन की लागत तथा बैगों पर मुद्रित एमआरपी के बीच कोई परस्‍पर संबंध नहीं होता, वहां राजसहायता को प्रतिबंधित या देने से मना किया जा सकता है भले ही उत्‍पाद अन्‍यथा एनबीएस योजना के अंतर्गत राजसहायता के लिए पात्र हों। राजसहायता तन्‍त्र के दुरूपयोग के प्रमाणित मामले में उर्वरक विभाग आईएमसी की सिफारिश पर किसी भी विशेष कंपनी के उर्वरको के किसी ग्रेड या ग्रेडों को उर्वरक कंपनी भी एनबीएस योजना के बाहर कर सकता है।

 

(iii)    एमआरपी की औचित्‍यता का निर्धारण बैगों पर मुद्रित एमआरपी के संदर्भ के साथ किया जाएगा।

 

(iv)    कंपनियों को समय-समय पर उर्वरक विभाग की आवश्‍यकता और निदेश के अनुसार प्रमाणित लागत आंकड़े प्रस्‍तुत करने होगें। कंपनियों उर्वरक विभाग को नियमित रूप से पीएण्‍डके उर्वरकों के एमआरपी भी सूचित करेंगे।  

 

(V)    पीएण्‍डके कंपनियों को बैगों पर वही एमआरपी मुद्रित करनी चाहिए जो एफएमएएस में प्रत्‍येक राज्‍य में लागू हो। दूसरे शब्‍दों में, उर्वरक बैगों पर मुद्रित और विशिष्‍ट राज्‍य के लिए एफएमएस में सूचित एमआरपी में कोई अन्‍तर नहीं होना चाहिए।

 

(vi)    किसी माह विशेष के लिए ‘लेखागत’ दावे करते समय उर्वरक कंपनियों को एफएमएस में प्रविष्‍ट अपने उत्‍पाद की एमआरपी की सही होने को प्रमाणित करना होगा और बिल प्रस्‍तुत करना होगा और बिल प्रस्‍तुत करने की तारीख तक एफएमएस में एमआरपी अद्यतन भी सुनिश्चित करना है।  

 

6.6   पीएण्‍डके उर्वरकों के एमआरपी की निगरानी: 

  

      उर्वरक कंपनियों द्वारा नियत पीएण्‍डके उर्वरकों के मूल्‍य की निगरानी के उद्देश्‍य से उन्‍हें छमाही आधार पर 2012-13 से, एनबीएस योजना के तहत पीएण्‍डके उर्वरकों के लागत आंकड़ें प्रस्‍तुत करने के लिए कहा गया है। पीएण्‍डके उर्वरकों के वास्‍तविक फार्म गेट मूल्‍यों को इकट्टठे करने के उद्देश्‍य से विभाग, उपभोक्‍ता मामले विभाग और अन्‍य संबंधित संगठनों के परामर्श से एक तंत्र विकसित कर रहा है।

 

6.7   एनबीएस व्‍यवस्‍था के तहत पीएंडके उर्वरकों पर भाड़ा राजसहायता नीति:

 

(क)   1.4.2010 से 31.12.2010 तक एनबीएस नीति के तहत राजसहायता प्राप्‍त पीएंडके उर्वरकों (एसएसपी को छोड़कर) के वितरण/संचलन के लिए भाड़ा राजसहायता रेल भाड़े तक सीमित थी  द्वितीयक भाड़ा (रेक बिंदु से जिला स्‍थल तक) नियत राजसहायता का भाग माना जाता था। सीधे सड़क संचलन के कारण भाड़ा प्रतिपूर्ति वास्‍तविक दावों के अनुसार अदा की जाती थी बशर्ते कि यह अधिकतम 500 कि.मी. तक के रेल भाड़े के बराबर हो।

 

(ख)   1.11.2011 से 31.3.2012 तक, सभी पीएंडके उर्वरकों (एसएसपी को छोड़कर) के प्रारंभिक संचलन (संयंत्र या बन्‍दरगाह से रेल द्वारा विभिन्‍न रेक बिंदुओं तक) तथा द्वितीयक संचलन (नजदीकी रेक बिंदुओं से सड़क द्वारा जिलों के  ब्‍लॉक मुख्‍यालयों तक) के कारण भाड़े की प्रतिपूर्ति उस अवधि के दौरान लागू एक समान भाड़ा राजसहायता नीति के अनुसार अदा की जाती थी। सभी पीएंडके उर्वरकों (एसएसपी को छोड़कर) के सीधे सड़क संचलन के लिए (संयंत्र या बंदरगाह से ब्‍लॉक तक सड़क द्वारा) भाड़ा राजसहायताकी वास्‍तविक दावों के अनुसार प्रतिपूर्ति की जाती थी जो कि अधिकतम 500 कि.मी. के रेल भाड़े के बराबर थी। 1.4.2010 से 31.3.2012 तक सीधे सड़क संचलन के लिए भाड़े की प्रतिपूर्ति हेतु दरें निम्‍न प्रकार थीं :-

 

संचलन (किमी.)

दरें रु./मी.टन

100 तक

108

101-200

183

201-300

256

301-400

327

401-500

400

 

(ग)    1.4.2012 से पीएंडके उर्वरकों के लिए भाड़ा राजसहायता निम्‍न प्रकार है-

 

(i)     सभी पीएंडके उर्वरकों (एसएसपी को छोड़कर) प्रारंभिक संचलन के कारण भाड़े की प्रतिपूर्ति   रेल रसीद के अनुसार वास्‍तविक रेल भाड़े के आधार पर की जाती है।

(ii)    सभी पीएंडके उर्वरकों (एसएसपी को छोड़कर) की द्वितीयक संचलन के कारण प्रतिपूर्ति नहीं की जाती है।

(iii)    सभी पीएंडके उर्वरकों (एसएसपी को छोड़कर) के सीधे सड़क संचलन के लिए भाड़ा राजसहायता वास्‍तविक दावों के अनुसार प्रतिपूर्ति की जाती है जो कि उर्वरक विभाग द्वारा समय-समय पर जारी समकक्ष रेल भाड़े के अधीन है। तथापि, सीधे सड़क संचलन के तहत अधिकतम अनुमत्‍य दूरी 500 कि.मी. होगी।

(iv)    सभी पीएंडके उर्वरकों (एसएसपी को छोड़कर) के लिए द्वितीयक संचलन के कारण विशेष    क्षतिपूर्ति दुर्गम क्षेत्रों नामत: हिमाचल प्रदेश, उत्‍तराखण्‍ड, सिक्किम, जम्‍मू और कश्‍मीर, 7      पूर्वोत्‍तर राज्‍य  तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के लिए प्रदान की जाती है।

 

6.8   एनबीएस के तहत राजसहायता की अदायगी की पद्धति: 

 

(क)   एसएसपी के अलावा पीएण्‍डके उर्वरक: उर्वरक कंपनियों के राजसहायता दावों का 85% (बैंक गांरटी सहित 90%) कम्‍पनी के सांविधिक लेखा-परीक्षक के प्रमाणीकरण पर जिले में उर्वरक की प्राप्ति पर ‘लेखागत’ भुगतान के रूप में अदा किया जाता है। एम-एफएमएस में राज्‍य सरकार द्वारा मात्रा के प्रमाणीकरण और मोबाईल उर्वरक निगरानी पद्धति (एम-एफएसएस) के जरिए खुदरा वितरकों द्वारा उर्वरक प्राप्ति सुनिश्चित करने पर शेष 15-10% की निर्मुक्ति की जाती है।

 

(ख)   एसएसपी: राजसहायता के दावों का 85% (बैंक गारंटी सहित 90%) कम्‍पनी के सांविधिक लेखा परीक्षक के प्रमाणीकरण पर जिले में उर्वरकों की पहले केन्‍द्र पर बिक्री पर ‘लेखागत’ भुगतान के रूप में अदा किया जाता है। शेष 10-15% दावों को राज्‍य सरकार द्वारा  एमएफएमएस में मात्रा एवं गुणवत्‍ता को प्रमाणित करने और साथ ही खुदरा डीलरों द्वारा एम-एफएमएस के जरिए उर्वरक प्राप्ति सुनिश्चित करने पर जारी किया जाता है।   

 

7.    एसएसपी के लिए रियायत योजना/पोषक-तत्‍व आधारित राजसहायता 

 

      पीएण्‍डके उर्वरकों के नियंत्रणमुक्‍त होने के बाद एसएसपी के लिए रियायत योजना को 1993-94 से लागू किया गया था जो 30.4.2008 तक तदर्थ आधार पर रियायत हेतु जारी रही। रियायत योजना के प्रशासन के कार्य का कृषि और सहकारिता विभाग से उर्वरक विभाग में अक्‍तूबर 2000 से अंतरण होने के बाद उर्वरक विभाग ने दिशा-निर्देशों में संशोधन किया था। तदनुसार, पीडीआईएल के तत्‍वावधान में एक तकनीकी औडिट और निरीक्षण प्रकोष्‍ठ (टीएसी) का गठन दिनांक 17.5.2001 के दिशानिर्देशों द्वारा किया गया था। रियायत के भुगतान का दावा करने के लिए एसएसपी के उत्‍पादकों को रॉक फॉस्‍फेट के केवल उन्‍हीं ग्रेडों का प्रयोग करना होता है, जिन्‍हें उर्वरक विभाग द्वारा समय-समय पर अधिसूचित किया गया है। एसएसपी की सभी नई उत्‍पादक इकाइयों को, एफसीओ के अंतर्गत निर्धारित मानदण्‍डों के अनुसार एसएसपी का उत्‍पादन करने के लिए अपनी तकनीकी दक्षता का पता लगाने के लिए इकाइयों का पहली बार तकनीकी निरीक्षण कराना जरूरी था। तत्‍पश्‍चात् इकाइयों को छमाही निरीक्षण भी कराना था ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्‍या इकाइयां रियायत योजना के सिद्धांतों के अनुसार कार्य कर रही हैं।

 

       इकाइयों को रियायत के 85% ‘लेखागत’ भुगतान का दावा करने की अनुमति दी गई थी जिसे बाद में निर्धारित प्रपत्र ‘ख’ में राज्‍य सरकारों द्वारा जारी बिक्री प्रमाण-पत्र के आधार पर उर्वरक विभाग द्वारा तय किया जाता है। यह प्रक्रिया आज की तारीख तक जारी रखने की अनुमति दी गई है यद्यपि एसएसपी के लिए अन्‍य नीतिगत मानदण्‍डों को समय-समय पर परिवर्तित किया गया है।

 

      सरकार ने दिनांक 25.8.2008 की अधिसूचना के जरिए 1.5.2008 से एसएसपी की रियायत योजना में संशोधन किया जो 30.9.2009 तक जारी रही। इस नीति के अनुसार उर्वरक विभाग ने प्रत्‍येक राज्‍य द्वारा एमआरपी दर्शाने की पिछली प्रणाली के स्‍थान पर संपूर्ण भारत में 3400 रुपए प्रति मी.टन की एमआरपी की घोषणा की। दिनांक 28.8.2008 की नीति के अनुसार आयातित रॉक फॉस्‍फेट तथा स्‍वदेशी रॉक फॉस्‍फेट आधार पर एसएसपी के लिए अलग से माह-वार रियायत दरों की घोषणा की गई थी। रॉक फास्‍फेट, सल्‍फर की कच्‍ची सामग्रियों के मूल्‍यों तथा  विनिमय दर के समय-समय पर बढ़ने/घटने के आधार पर रियायत बढ़ाई/घटाई गई थी। एसएसपी की गुणता सुनिश्चित करने की दृष्टि से, एसएसपी उत्‍पादकों उन राज्‍य सरकारों द्वारा जारी गुणता प्रमाण पत्र प्रस्‍तुत करना अपेक्षित है, जहां पर उनकी इकाइयां स्‍थापित है। इकाइयों से अपेक्षित है कि वे एसएसपी के प्रत्‍येक बैग पर ‘गुणता प्रमाणित लिखें/मुद्रित कराएं।      

 

      तत्पश्‍चात् उर्वरक विभाग ने 13.8.2009 की अधिसूचना द्वारा  नीति में पुन: संशोधन  करने की घोषणा की थी जो 1.10.2009 से लागू हुई और 30.4.2010 तक जारी रही। इस नीति के अनुसार, सरकार ने अखिल भारत आधार पर 3400 रुपए प्रति मी.टन की पिछली एमआरपी की बजाए 1.10.2009 से एसएसपी के बिक्री मूल्‍य को खुला रखने का निर्णय लिया था। सरकार ने पाउडर्ड, दानेदार और बोरोनयुक्‍त एसएसपी के लिए 2000 रुपए प्रति मी.टन के हिसाब से तदर्थ रियायत उपलब्‍ध कराई है। केवल उन्‍हीं एसएसपी उत्‍पादकों को राजसहायता का दावा करने की अनुमति दी गई थी, जिन्‍होंने वार्षिक स्‍थापित क्षमता का 50% या 40,000 मी.टन प्रति वर्ष का उत्‍पादन किया है। रियायत की ‘लेखागत’ तथा बकाया भुगतान जारी करने की प्रणाली पहले की ही तरह जारी रही। इसके अलावा, पोषक-तत्‍व आधारित राजसहायता नीति में 1.5.2010 से एसएसपी को भी शामिल किया गया है।

 

      वर्ष 1993-94 से 2014-15 के दौरान राजसहायता की दर और एसएसपी की एमआरपी निम्‍नलिखित प्रकार है:-

 

अवधि

राजसहायता की दर

एमआरपी (रुपये प्रति मी.टन)

रियायत योजना के तहत

1993-94 से 2007-08

राजसहायता की भिन्‍न राशि

30.4.2008 तक, संबंधित राज्‍य सरकारों द्वारा अपने राज्‍य में एसएसपी की बिक्री के लिए एमआरपी नियत की जाती थी।

2008-09

(1.5.2008 से 30.9.2009)

भारत सरकार द्वारा घोषित माह-वार राजसहायता जैसा कि नीचे सारणी-क में उल्लिखित है। 

1.5.2008 से 30.9.2009, तक 3400 रुपये प्रति मी.टन अखिल भारतीय एमआरपी

2009-10

(1.10.2009 से 30.4.2010)

 रुपये. 2000 पीएमटी

1.10.2009 से 30.4.2010, तक खुली एमआरपी।

 

एनबीएस योजना के तहत

मई 2010 से दिसंबर  2010

4400

समझौता ज्ञापन के अनुसार नियंत्रण के तहत एमआरपी (3200 रुपये प्रति मी.टन)

जनवरी. 2011 से मार्च 2011

4296+रुपए. 200 भाड़ा

अप्रैल  2011 से मार्च 2012

5359

 3.5.2011 से खुली एमआरपी

अप्रैल 2012 से मार्च 2013

3673

खुली एमआरपी

अप्रैल 2013 से मार्च 2014

3173

खुली एमआरपी

अप्रैल 2014 से मार्च 2015

3173

खुली एमआरपी

 


सारणी क 

       एसएसपी हेतु रियायत योजना के तहत मई 2008 से सितम्‍बर 2009 तक की अवधि के लिए एसएसपी हेतु रियायत दर (नीति अधिसूचना सं.22011/4/2007-एमपीआर दिनांक 25.08.2008 लागत लेखा शाखा 2004 की रिपोर्ट पर आधारित थी) (अखिल भारतीय एमआरपी 3400/- रुपये प्रति मी.टन नियत और आयातित और स्‍वदेशी रॉक के लिए लागू माह-वार रियायत)

 

माह/वर्ष

आयातित रॉक फास्‍फेट पर आधारित रियायत दर

(रुपये.प्रति मी.टन)

स्‍वदेशी आयातित रॉक फास्‍फेट पर आधारित रियायत दर

 (रुपये.प्रति मी.टन)

मई, 2008

6406

4587

जून, 2008

8942

5383

जुलाई, 2008

9160

5674

अगस्‍त, 2008

10391

6776

सितंबर, 2008

11661

6990

अक्‍तूबर, 2008

13003

5823

नवम्‍बर,2008

7914

3070

दिसम्‍बर, 2008

8965

2012

जनवरी, 2009

8075

1967

फरवरी, 2009

7503

1961

मार्च, 2009

5870

1944

अप्रैल, 2009

2927

1873

मई, 2009

2709

2006

जून, 2009

2453

1982

जुलाई, 2009

2510

1986

अगस्‍त 2009

1951

2331

सितंबर 2009

2251

2295

 

8.    उर्वरकों की गुणवत्‍ता  

 

      भारत सरकार ने अनिवार्य वस्‍तु अधिनियम, 1955 (ईसीए) के अंतर्गत उर्वरक को एक अनिवार्य वस्‍तु घोषित किया है तथा इस अधिनियम के अंतर्गत उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 (एफसीओ) अधिसूचित किया है। तदनुसार, राज्‍य सरकारों की यह जिम्‍मेदारी है कि वे ईसीए के अंतर्गत एफसीओ में निर्धारित अनुसार उर्वरकों के उत्‍पादकों/आयातकों द्वारा उर्वरकों की गुणवत्‍ता की आपूर्ति सुनिश्चित करें। एफसीओ के प्रावधान के अनुसार उर्वरक, जो आदेश में निर्धारित गुणवत्‍ता के मानक को पूरा करते हैं, को ही किसानों को बेचा जा सकता है। कुल 71 उर्वरक परीक्षण प्रयोगशालाएं हैं जिनमें फरीदाबाद, कल्‍याणी, मुंबई और चेन्‍नई में भारत सरकार की चार प्रयोगशालाएं हैं जिनकी वार्षिक विश्‍लेषण क्षमता 1.34 लाख नमूने हैं। देश में आयातित उर्वरकों की गुणवत्‍ता की भारत सरकार की उर्वरक गुणवत्‍ता नियंत्रण प्रयोगशालाओं द्वारा निरपवाद रूप से जांच की जाती है।

 

      राज्‍य सरकारों को देश में कहीं भी उर्वरकों के नमूने लेने और अवमानक उर्वरकों की बिक्री करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के लिए पर्याप्‍त रूप से अधिकार दिए गए हैं। दण्‍ड प्रावधान में दोषियों पर मुकदमा चलाना और दोषी पाए जाने पर प्राधिकार प्रमाण-पत्र रद्द करने तथा अन्‍य प्रशासनिक कार्रवाई के अलावा ईसीए 1955 के अंतर्गत सात साल की सजा देना भी शामिल है। उर्वरक विभाग उन उर्वरकों की मात्रा पर दण्‍डात्‍मक ब्‍याज सहित कटौतियां करता है जिनके लिए राज्‍य सरकारों द्वारा अवमानक उर्वरक होने की सूचना दी जाती है।

 

      विभाग द्वारा पीएण्‍डके उर्वरकों तथा सिंगल सुपर फॉस्‍फेट (एसएसपी) पर रियायत का भुगतान राज्‍य में प्राप्‍त और बेचे गए उर्वरकों हेतु प्रोफार्मा ‘ख’ में संबंधित राज्‍य सरकारों द्वारा दिए गए गुणवत्‍ता प्रमाण-पत्र को ध्‍यान में रखकर किया जाता है। इसके अलावा, एसएसपी इकाइयों को उन राज्‍यों की राज्‍य सरकारों द्वारा जारी माह-वार ‘गुणवत्‍ता प्रमाणपत्र’ प्रस्‍तुत करने होते हैं जहां ये इकाइयां स्थित होती हैं। इकाइयों में एसएसपी के नमूनों का परीक्षण करने के लिए सुसज्ज्ति प्रयोगशालाएं स्‍थापित करनी होती हैं। एसएसपी इकाइयों को बाजार में जारी प्रत्‍येक बैग पर ‘गुणवत्‍ता प्रमाणित’ भी मुद्रित करना होता है। उर्वरक विभाग, पीडीआईएल को नई एसएसपी इकाइयों का पहली बार तकनीकी निरीक्षण करने के लिए भी नियुक्‍त करता है। पीडीआईएल उर्वरकों की मात्रा और गुणवत्‍ता की जांच करने के लिए एसएसपी इकाइयों का छमाही निरीक्षण भी करती है जिसके लिए इकाइयां राजसहायता के भुगतान का दावा कर रही हैं। इकाइयों से एनबीएस के अंतर्गत एसएसपी का उत्‍पादन करने के लिए आदानों के रूप में रॉक फॉस्‍फेट के केवल उन ग्रेडों का इस्‍तेमाल की अपेक्षा होती है, जिन्‍हें उर्वरक विभाग द्वारा समय-समय पर अधिसूचित किया जाता है। अधिसूचित ग्रेडों को दर्शाने वाला एक विवरण अनुलग्‍नक-XIII में दिया गया है। उर्वरक विभाग ने राज्‍य सरकारों को पीडीआईएल के साथ दल का गठन करने के लिए भी कहा है ताकि खुदरा व्‍यापारी स्‍तर पर सिंगल सुपर फॉस्‍फेट (एसएसपी) के नमूनों की जांच की जा सके। एसएसपी के विपणनकर्ता उनके द्वारा विपणन किए गए उर्वरकों की गुणवत्‍ता के लिए भी जिम्‍मेदार होते हैं। उर्वरक विभाग ने राज्‍यों में उर्वरकों की उपलब्‍धता और गुणवत्‍ता की जांच करने के लिए विभाग के अधिकारियों के सतर्कता दलों का भी गठन किया है।  

 

9.    पिछले 10 वर्षों के दौरान पीएण्‍डके उर्वरकों और यूरिया पर राजसहायता व्‍यय:

  

 ­             (रुपये करोड में) 

वर्ष

पीएण्‍डके के उर्वरकों पर राजसहायता 

 

पीएण्‍डके उर्वरकों के लिए राजसहायता व्‍यवस्‍था

यूरिया पर राजसहायता

यूरिया उर्वरकों के लिए राजसहायता व्‍यवस्‍था

कुल राजसहायता व्‍यय (पीएण्‍डके यूरिया)

2005-06

  6596.19

रियायत योजना

12793.45

 

 

 

नई मूल्‍य निर्धारण योजना

19389.64

2006-07

10298.12

17721.43

28019.55

2007-08

16933.80

26385.36

43319.16

2008-09

65554.79

33939.92

99494.71

2009-10

39452.06

24580.23

64032.29

2010-11

41500.00

 

एनबीएस व्‍यवस्‍था

24336.68

65836.68

2011-12

36107.94

37683.00

73790.94

2012-13

30576.10

40016.00

70592.10

2013-14

29426.86

41853.30

71280.16

2014-15 (बीई)

24670.30

47400.00

72070.30

 

 

 10.   एनबीएस नीति के प्रभाव पर अध्‍ययन  

 

      एनबीएस नीति के कार्यान्‍वयन में बेहतर परिणाम प्राप्‍त करने के उद्देश्‍य से, विभाग ने मैसर्स अर्नस्‍ट एवं यंग (ईवी) नामक परामर्शदाता फर्म को एनबीएस नीति के प्रभाव का अध्‍ययन कार्य सौंपा गया है। अध्‍ययन के प्रमुख केन्द्रित क्षेत्र निम्‍न प्रकार हैं:

 

(i)            भारत में उर्वरकों के मूल्‍यों एवं उपलब्‍धता पर एनबीएस नीति का प्रभाव।

(ii)                 मृदा के संतुलित उर्वरण पर एनबीएस नीति का प्रभाव और कृषि उत्‍पादकता पर        इसका प्रभाव।

(iii)          एमआरपी की ‘औचित्‍यता’ सुनिश्चित करने के लिए तंत्र।

(iv)   एनबीएस नीति के तहत अतिरिक्‍त तंत्र की पहचान ताकि इसके लक्ष्‍य प्राप्‍त करने के लिए इसे अधिक प्रभावशाली बनाया जा सके।

(v)    मूल्‍यों की निगरानी एवं विनियमन।

(vi)   मूल्‍य प्रकटीकरण (प्राइस-डिसकवरी) और मूल्‍य नियतन।       

 

      मैसर्स ईवी से प्राप्‍त रिपोर्ट को संबंधित मंत्रालयों को टिप्‍पणियों के लिए भेजा गया है। उर्वरक विभाग संबंधित मंत्रालयों/विभागों और पणधारी कंपनियों से प्राप्‍त टिप्‍पणियों की समीक्षा के पश्‍चात् इस संबंध में उचित कदम उठाएगा।

 

 

 

 पोषक तत्‍व आधारित राजसहायता व्‍यवस्‍था के तहत उर्वरक कंपनियों द्वारा नियत पीएण्‍डके उर्वरकों के उच्‍चतम अधिकतम खुदरा मूल्‍य (एमआरपी) रुपये/मी.टन में

#

उर्वरकों के ग्रेड

10-11(तिमाही वार)

11-12(तिमाही वार)

2012-13(तिमाही वार)

2013-14 (तिमाही वार)

I

II

III

IV

I

II

III

IV

I

II

III

IV 

I

II

III 

IV

1

डीएपी: 18-46-0-0 

9950

9950

9950

10750

12500

18200

20297

20000

24800

26500

26500

26500

26520

25000

24607

24607

2

एमएपी : 11-52-0-0

9950

लागू नहीं

लागू नहीं

लागू नहीं

 

18200

20000

20000

20000

24200

24200

लागू नहीं

लागू नहीं

लागू नहीं

लागू नहीं

लागू नहीं

3

टीएसपी : 0-46-0-0

8057

8057

8057

8057

8057

8057

17000

17000

17000

लागू नहीं

लागू नहीं

17000

लागू नहीं

17000

17000

लागू नहीं

4

एमओपी : 0-0-60-0

5055

5055

5055

5055

6064

11300

12040

12040

16695

23100

24000

18750

18638

17750

17750

17750

5

16-20-0-13

6620

6620

6620

7200

9645

14400

15300

15300

15300

18200

18200

18200

17280

17710

17510

17010

6

20–20–0-13 

7280

7280

7395

8095

11400

14800

15800

15800

19000

24800

19176

24800

20490

19166

23500

23500

7

23–23–0-0 

लागू नहीं

लागू नहीं

लागू नहीं

7445

7445

7445

एनबीएस नीति से बाहर।                                  

8

10–26–26-0 

8197

लागू नहीं

8300

10103

10910

16000

16633

16386

21900

22225

22225

22225

22213

22200

21160

21160

 

9

12–32–16-0

8637

8237

8637

9437

11313

16400

16500

16400

22300

23300

22500

24000

23300

23300

21475

21105

10

14–28–14-0

लागू नहीं

लागू नहीं

लागू नहीं

लागू नहीं

 

14950

17029

लागू नहीं

लागू नहीं

लागू नहीं

लागू नहीं

लागू नहीं

लागू नहीं

लागू नहीं

लागू नहीं

लागू नहीं

11

14–35–14-0

लागू नहीं

लागू नहीं

लागू नहीं

9900

11622

15148

17424

17600

17600

23300

23300

23300

23300

23300

21810

21810

12

15–15–15-0

लागू नहीं

लागू नहीं

लागू नहीं

7421

8200

11000

11500

11500

13000

15600

15600

15600

15600

15150

15150

15150

13

एएस: 20.3-0-0-23

8600

8600

7600

8700

7600

11300

10306

10306

11013

11013

11013

11013

11106

11106

11184

11689

14

20-20-0-0

5943

लागू नहीं

6243

7643

9861

14000

15500

18700

18700

24450

24450

18500

15561

15262

18000

18000

15

28–28–0-0

लागू नहीं

लागू नहीं

लागू नहीं

11181

11810

15740

18512

18700

24720

24720

23905

23905

23905

23410

21907

21907

16

17–17–17-0

 

 

 

 

 

 

 

17710

20427

20522

20572

20672

20672

22947

24013

23231

17

19–19–19-0

 

 

 

 

 

 

 

18093

19470

19470

19470

लागू नहीं

लागू नहीं

0

20915

20915

18

एसएसपी(0-16-0-11)*

3200

3200

3200

3200

3200

4000 to 6300

6500 to 7500

 

 

6200-9900

9270

10300

9270

19

16-16-16-0

 

 

 

7100

7100

7100

15200

15200

15200

 

 

 

 

18000

18000

17000

20

डीएपी लाइट     (16-44-0-0)

 

 

 

लागू नहीं

11760

17600

19500

19500

19500

24938

24938

24938

24938

23875

22900

22000

21

15-15-15-09

 

 

 

6800

9300

12900

15750

14851

15000

15000

15000

लागू नहीं

लागू नहीं

0

 

15670

22

24-24-0-0

 

 

 

7768

9000

11550

14151

14297

14802

16223

16223

18857

18857

17896

17896

17896

23

13-33-0-6

 

 

 

 

 

16200

17400

17400

17400

17400

17400

एनबीएस नीति से बाहर

24

एमएपी लाइट   (11-44-0-0)

 

 

 

 

 

16000

18000

18000

18000

21500

21500

25

डीएपी लाइट-II (14-46-0-0)

 

 

 

 

 

14900

18690

18300

18300

24800

24800

एमआरपी से कर शामिल नहीं हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

क्रम सं 7,23,24,25 पर उल्लिखित उर्वरक ग्रेड वर्तमान में राजसहायता योजनाओं के अंतर्गत नहीं आते हैं। 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

खाली स्‍थान/एनए का तात्‍पर्य बाजार में उपलब्‍ध नहीं है/राजसहायता योजना के अंतर्गत नहीं है।