सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (आरटीआई)

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (आरटीआई) को भारत के राष्‍ट्रपति द्वारा 15.6.2005 को मंजूरी दी गई थी और यह 21.6.2005 को अधिसूचित किय गया था। अधिनियम की कुछ धाराएं नामत: धारा 4(1), 5(1) और (2), 12, 13, 15, 16, 24, 27 और 28 जो रिकार्ड/सूचना के रख रखाव और कंप्‍यूटरीकरण/सूचना, जन सूचना अधिकारी के पदनाम (सीपीआईओ), केंद्रीय सूचना आयोग, राज्‍य सूचना आयोग के गठन, कुछ संगठनों को छोड़ने से संबंधित हैं, तुरन्‍त प्रभाव से अस्ति‍त्‍व में आ गई थीं। आरटीआई अधिनियम के शेष प्रावधान इसके लागू होने की तारीख से 120वें दिन अर्थात् 12 अक्‍तूबर, 2005 से लागू हो गए थे।

आरटीआई अधिनियम के अनुपालन में विभाग ने सीपीआईओ और सीएपीओ को पदनामित किया है। विभाग के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन संबंधित पीएसयू को आरटीआई अधिनियम का अनुपालन सुनिश्‍चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिनियम के अनुपालन में विभाग द्वारा उठाए गए कुछ महत्‍वपूर्ण कदम निम्‍न प्रकार हैं:-

इस‍की वेबसाइट http://fert.nic.in, बाहरी वेबसाइट जो नई विंडो में खुलती है, पर आरटीआई अधिनियम के लिए अलग से एक लिंक बनाया गया था और उसमें अधिनियम के अंतर्गत्‍ अपेक्षित विभाग के बारे में आरटीआई पर एक पुस्तिका डाली गई जिसमें सामान्‍य सूचना है।

वेबसाइट पर अपेक्षित ब्‍योरे सहित पीआईओ को पदोनामित करने वाले आदेश डाले गए जिन्‍हें समय-समय पर अद्यतन बनाया जाता है।

शास्‍त्री भवन में उर्वरक विभाग के जन सूचना केंद्र पर आरटीआई के आवेदन तथा निर्धारित शुल्‍क प्राप्‍त करने के लिए काउंटर खोला गया।

देश भर में सीएपीआईओ के रूप में डाक विभाग द्वारा सेवा उपलब्‍ध कराने में सक्षम बनाने के लिए उस विभाग को नोडल अधिकारी की नियुक्ति की सूचना दी गई।

विभाग ने सीआईसी की वेबसाइट पर उपलब्‍ध प्रबंधन सूचना प्रणाली (आरटीआई-आरएएमआईएस) सॉफ्टवेयर पर आरटीआई अधिनियम के अंतर्गत आवेदन और अपील का पंजीकरण प्रारंभ किया है।

वर्ष 2010-2011 के दौरान 112 आवेदन और 5 अपीलें प्राप्‍त हुई थीं जिनमें से 101 आवेदन और 5 अपीलों को उक्‍त वर्ष के दौरान निपटाया गया था तथा शेष 11 आवेदनों पर आवेदकों को उत्‍तर भेजे जाने की प्रक्रिया चल रही है।