हमारे बारे में

उर्वरक विभाग रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अधीन है जिसके अध्यक्ष केबिनेट मंत्री हैं। मंत्री महोदय की सहायता के लिए दो राज्य मंत्री हैं। उर्वरक विभाग का मुख्य उद्देश्य में कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए सस्ती कीमतों पर पर्याप्त मात्रा में और समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। उर्वरक विभाग की मुख्य गतिविधियों में उर्वरक उद्योग की योजना बनाना, प्रोत्‍साहन एवं विकास करना, उत्‍पादन की योजना बनाना तथा निगरानी रखना, उर्वरकों का आयात और वितरण करना तथा स्‍वदेशी और आयातित उर्वरकों के लिए राजसहायता/रियायत के माध्‍यम से वित्‍तीय सहायता का प्रबंधन करना शामिल है। इस विभाग के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र के 9 उपक्रम और एक बहुराज्य सहकारी सोसायटी है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों एवं सहकारी सोसायटी के बारे में और अधिक जानकारी उर्वरक पीएसयू लिंक से प्राप्त की जा सकती है।

 

इस विभाग के अंतर्गत उर्वरक उद्योग समन्वय समिति (एफआईसीसी) नामक एक संबद्ध कार्यालय भी है जिसके अध्यक्ष कार्यकारी निदेशक हैं। एफआईसीसी का गठन प्रारंभ में दिनांक 1.12.1977 को तत्कालीन प्रतिधारण मूल्य्-सह-राजसहायता योजना (एनपीएस) को प्रशासित और संचालित करने के उद्देश्य से किया गया था। व्यापक आंतरिक दक्षता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा प्राप्‍त करने के लिए आरपीएस के इकाई विशिष्ट दृष्टिकोण के स्थान पर दिनांक 1.4.2003 से नई मूल्य-निर्धारण योजना (एनपीएस) नामक एक स्कीम लागू की गई थी। यूरिया संबंधी योजना को प्रशासित करने के लिए एफआईसीसी को नई मूल्य‍–निर्धारण योजना के अंतर्गत बनाए रखा गया है। एफआईसीसी के संबंध में और अधिक जानकारी प्राप्त‍ करने के लिए कृपया संगठनात्मक ढांचा के अंतर्गत एफआईसीसी लिंक देखें। भारत सरकार (कार्य आबंटन) नियम 1961, समय-समय पर यथासंशोधित, के अनुसार उर्वरक विभाग को आबंटित विषयों की सूची अनुलग्नक-। में दी गई है।


उद्देश्‍य


सुदृढ़ घरेलू उर्वरक उद्योग द्वारा समर्थित सतत् कृषि विकास हेतु देश के लिए उर्वरक सुरक्षा हासिल करना।


मिशन

देश में उर्वरकों के योजनाबद्ध उत्‍पादन और आया‍त तथा वितरण और यूरिया उत्‍पादन में आत्‍मनिर्भरता की योजना के जरिए किसानों को वहनीय मूल्‍यों पर उर्वरकों की पर्याप्‍त और समयोचित उपलब्‍धता सुनिश्‍चित करना। 

 

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