प्रौद्यो-आर्थिक अनापत्ति (टीईसी) दिशा-निर्देश

अधिसूचनाओं की आवश्‍यकता के अनुसार उर्वर‍क विभाग ने प्रौद्यो-आर्थिक अनापत्ति(टीईसी) देने के लिए आंतरिक दिशा-निर्देश तैयार किये हैं। नए उर्वरक संयंत्र (आरम्‍भिक स्‍थापना अथवा बड़ा विस्‍तार) और मौजूदा उर्वरक संयंत्र के नवीनीकरण/आधुनिकीकरण/पुनरुत्‍थान के लिए परियोजना आयात हेतु टीईसी नीचे दिए गए अनुसार दो स्‍तरीय अनापत्ति/प्रक्रिया के आधार पर दी जाती है।

 

(।)    पहले स्‍तर पर, प्रस्‍ताव की अनिवार्यता की जांच उर्वरक विभाग के निदेशक (ईएण्‍डएस) द्वारा तकनीकी जानकारी हेतु पीडीआईएल के परामर्श से की जाती है और इसे आर्थिक सलाहकार और एएसएण्‍डएफए के जरिए सचिव, उर्वरक विभाग के अनुमोदन हेतु प्रस्‍तुत किया जाता है। प्रस्‍ताव की जांच योजना/परियोजना की अनुमानित पूंजी लागत और आयात हे‍तु प्रस्‍तावित सामान की लागत के आधार पर की जाती है। अनिवार्यता के अलावा, आवेदक/आयातक को वस्‍तुओं की खरीद के लिए प्रतिस्‍पर्धात्‍मक बोली प्रक्रिया अपनाना भी अपेक्षित है ताकि लागत को कम किया जा सके। स्‍वामित्‍व मदों के संबंध में आयातित मद के मूल्‍य की युक्तिसंगतता कंपनी/आवेदक द्वारा तय की जानी है। अनिवार्यता और वस्‍तुओं के मूल्‍य की युक्तिसंगतता स्‍थापित कर दिए जाने के बाद परियोजना आयात के पहले चरण का प्रौद्यो-आर्थिक अनापत्ति/अनुमोदन दिया जाता है। परियोजना आयात के पहले चरण के प्रौद्यो-आर्थिक अनापत्ति/अनुमोदन देने के लिए सचिव, उर्वरक विभाग सक्षम प्राधिकारी हैं।

 

(।।)   दूसरे चरण में, आर्थिक सलाहकार के परामर्श से उर्वरक विभाग के निदेशक (ईएण्‍डएस) यह सुनिश्‍चित करने के बाद कि स्‍वामित्‍व प्रकृति की मदों के मामले को छोड़कर कंपनी/आवेदक द्वारा प्रतिस्‍पर्धात्‍मक बोली की प्रक्रिया का पालन किया गया है, आयात की जाने वाली मदों की सूची को सत्‍यापित करते हैं। तथापि, स्‍वामित्‍व मदों के मामले में आवेदक को मूल्‍य की युक्तिसंगतता तय करनी पड़ती है।